सिपाही हत्याकांड का खुलासा, जमीनी विवाद में हुई थी हत्या

प्रदीप फुटेला

गदरपुर (महानाद) : विगत 13 अगस्त को यूपी पुलिस के सिपाही की गोली मारकर की गई हत्या का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। इस मामले में दो आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं जबकि पांच अन्य अभी भी फरार हैं। जिनमें तीन नामजद है।

एसएसपी बरिंदरजीत सिंह ने थाने में घटना का खुलासा करते हुए मीडिया कर्मियों को बताया कि मयंक कटारिया पुत्र स्व. दयानंद निवासी ग्राम चंदेला थाना बिलासपुर जिला रामपुर उत्तर प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल के पद पर कार्यरत था तथा वर्तमान में माधोटांडा पीलीभीत में तैनात था। मयंक का इसी गांव के मनोज दुबे से करीब ढाई एकड़ पट्टे की भूमि को लेकर काफी समय से विवाद चल रहा था।

बीती 13 अगस्त को मयंक अपने कुछ दोस्तों के साथ महतोष मोड़ के पास खालसा ढाबे पर खाना खाने हेतु आया था। इसी बीच मनोज दुबे, बलजीत उर्फ जोत, गौरव उर्फ निक्का, उदयवीर उर्फ सन्नी ने मयंक की गोली मारकर हत्या कर दी। यह पूरी घटना ढाबे में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गयी।

मयंक के भाई नितेश ने इस घटना की नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने हत्या, अनुसूचित जाति /जनजाति अधिनियम समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज करते हुए घटना का खुलासा करने के लिए कई टीमो का गठन किया था। एसएसपी बरिंदरजीत खुद इस मामले की मॉनिटरिंग कर रहे थे ।पुलिस ने मनोज दुबे को पड़ाव हेल्थकेयर सेंटर के पास से तथा बलजीत सिंह उर्फ जोत सिंह निवासी मुकंद पुर को चीनी मिल रोड से पुलिस व एस टी एफ की सँयुक्त टीम ने धर दबोचा।

एसएसपी ने बताया कि वर्ष 2005 में जनार्दन दुबे पुत्र पंचदेव दुबे ने पट्टे की डेढ़ एकड़ जमीन ढाई लाख में मृतक के पिता दयानंद निवासी चंदेला को बेची थी। पट्टे की जमीन विक्रय नही होती जिस पर मनोज दुबे की माँ कांति देवी ने रामपुर कोर्ट में केस करके जमीन वापिस ले ली थी। जमीन पर मृतक मयंक के परिजनों द्वारा प्लाटिंग काटकर विभिन्न व्यक्तियों को जमीन बेच दी थी। मनोज दुबे द्वारा विवादित जमीन को कब्जा लेते समय उदय वीर सिंह उर्फ सन्नी वैरेक्टर लेकर मौके पर बुलाया था। विवादित जमीन को खाली करने के लिए विभिन्न माध्यमों से मनोज दुबे पर दबाव बनाया जा रहा था। जिस कारण उदयवीर और सनी को भी जमीन में हस्तक्षेप ना करें की धमकियां मिलने लगी। उदय वीर उर्फ सन्नी वीर के द्वारा अपने दोस्त गौरव निक्का उर्फ मोहित बलजीत सिंह ग्रुप जोता मनोज दुबे को धमकी संबंधी शिकायत की थी। मनोज दुबे के उकसाने पर मयंक अपने दोस्तों के साथ मिलकर हमारी हत्या कर सकता है। यदि मयंक को ना मारा गया तो हमारा बचना संभव नहीं है।

जिस पर गौरव निक्का और मोहित ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर एक वीडियो बनाकर फेसबुक पर वायरल की किमयंक को उसके गांव चंदेला में आकर मारा जाएगा। विगत 13 अगस्त को मयंक ने उपरोक्त वीडियो संबंधी अपने दोस्त बंटी रंधावा शेरा तथा अन्य को शिकायत की। जिस पर 13 अगस्त को ही उपरोक्त विवाद को लेकर गुरबाज सिंह निवासी राजपुरा के घर में एक मीटिंग बुलाई गई। परंतु सभी लोगों के ना पहुंचने के कारण समझौता नहीं हो पाया ।

13 अगस्त को शाम 4:00 बजे के करीब गूलरभोज रोड पर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और भविष्य में ना लड़ने संबंधी मौखिक समझौता किया। जिस पर दोनों पक्ष अगल-बगल दिशा में चले गए। 13 अगस्त की शाम को मनोज दुबे ने अपने साथी गौरव निक्का उर्फ मोहित, बलजीत, उदयवीर तथा कुछ अन्य लोगों को बुलाकर शराब भी पिलाई और एक अपराधिक षड्यंत्र के तहत सभी को उकसाया तथा खालसा ढाबे पर जाकर सिपाही मनोज की गोली मारकर हत्या कर दी और मौके से भाग गए। मयंक वहाँ खाना खाने गया था।

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