बीजेपी ने पीडीपी से गठबंधन करते समय ही रख दी थी 370 हटाने की नींव

महानाद ब्यूरो : 2014 में मोदी सरकार ने पीडीपी के साथ सरकार बनाते समय ही जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने की नींव रख दी थी।

बीजेपी ने सरकार में रहते हुए जम्मू कश्मीर के हालातों को अच्छी तरह से समझा और फिर पीडीपी को कोई मौका दिए बिना सरकार से समर्थन वापिस ले लिया।

महबूबा मुफ्ती ने सबसे बड़ी गलती की कि उसने मोदी से हाथ मिला कर कश्मीर में अपनी सरकार बनाई । मोदी को बहाना चाहिए था राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए, जो महबूबा की गलतियों की वजह से लगा दिया गया। अगर, महबूबा कोंग्रेस से हाथ मिलाती तो शायद ये संभव न होता।

अगर काँग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी को जरा भी भनक होती या अंदेशा होता कि मोदी सरकार को अगले आम चुनावों में इतना प्रचण्ड जनादेश मिलेगा और 370 हटा दी जाएगी, वे एक साथ आकर सरकार बनाने का दावा पेश कर देते और तब राज्य में राज्यपाल शासन नहीं लग पाता।

370 हटाने की शर्त में पेंच था कि राष्ट्रपति से 370 हटाने की अनुशंसा राज्य की विधानसभा को करनी होगी, वो शर्त पूरी नहीं होती। क्योंकि पीडीपी नेशनल कॉन्फ्रेंस कभी भी यह अनुशंसा नहीं करते। यही वह शर्त थी जिसके भरोसे कश्मीरी लीडर फुदकते थे कि केंद्र में कितनी भी मजबूत सरकार हो 370 हटा नहीं सकती। उन्हें विश्वास था कि कश्मीर में किसी की भी सरकार बने, विधानसभा से 370 हटाने की अनुशंसा कभी होगी ही नहीं।

उस समय भाजपा का पीडीपी के साथ गठबंधन बहुतो को रास नहीं आया था। लेकिन इस गठबंधन का फायदा भाजपा को यह हुआ कि उन्हें मुफ़्ती के क्षीण जनाधार की जानकारी मिल गयी और साथ ही भाजपा के साथ जाने की वजह से पीडीपी अब्दुल्ला और काँग्रेस के लिए अछूत हो गयी। अब्दुल्ला और कांगेस दोनों को लगा कि भाजपा की साथी रही पार्टी को अगर अभी सपोर्ट किया तो उनका मुस्लिम वोट बैंक नाराज हो जाएगा। इसी वजह से भाजपा की समर्थन वापसी के बाद दोनों ही दलों ने पीडीपी से किसी भी तरह के गठबंधन की संभावना को नकार दिया। यही 370 खत्म होनेकी नींव पड़ गयी थी।

भाजपा की इस स्ट्रेटेजी को काँग्रेस, पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस जैसी पार्टियां बिल्कुल भी समझ नही पाई। जिसका लाभ बीजेपी ने उठाकर कश्मीर से 370 खत्म कर दी।

आपको बता दें कि अनुच्छेद 370 वैसे तो जम्मू-कश्मीर सरकार की अनुमति के बगैर नही  हट सकता था लेकिन कानून यह भी कहता है कि अगर कश्मीर में चुनी हुई सरकार न हो और राज्य में राज्यपाल शासन हो तो सारे निर्णय राज्यपाल ले सकते है। उस समय राज्य की समस्त शक्तियां भारत की संसद के अधीन होंगी।

 

धारा 370 हटानेकी नींव 2014 से रखी गयी थी, पूरे घटनाक्रम में महबूबा मुफ्ती की सबसे बड़ी गलती की उसने मोदी से हाथ मिला कर कश्मीर में अपनी सरकार बनाई ।
मोदी को बहाना चाहिए था राष्ट्रपति शासन लगानेके लिए, जो महबूबा की गलतियों की वजहसे लगा दिया गया । जो अब लाइफटाइम रहेगा । अगर, महबूबा कोंग्रेस से हाथ मिलाती तो शायद ये संभव न होता।

मोदी के बिछाए शतरंज के इस खेल में सारे प्यादे एक एक करके गिरते गए, आखिरमें बची रानी के लिए वजीर ही काफी था ।

“द्वंद कहाँ तक पाला जाए,
युद्ध कहाँ तक टाला जाए,
तू भी है राणा का वंशज,
फेंक जहाँ तक भाला जाए ,
दोनों तरफ़ लिखा हो भारत,
सिक्का वही उछाला जाए.!”

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