बिना आरएफआईडी टैग लगे वाहन अब नहीं घुस पाएंगे दिल्ली में

नई दिल्ली (महानाद) : व्यावसायिक वाहनों पर रेडियो फ्रिक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) टैग शुक्रवार दिन में ही लगा लेना होगा क्योंकि बिना टैग वाले वाहनों को रात 12 बजे बाद दिल्ली में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। बिना टैग प्रवेश करने वाले वाहनों से भारी जुर्माना वसूला जाएगा।

तीनों एमसीडी की नोडल एजेंसी के तौर पर दक्षिणी दिल्ली एमसीडी ने साफ कर दिया है कि टैग लगाने के लिए अब किसी भी कीमत पर तारीख नहीं बढ़ाई जाएगी।

दक्षिणी दिल्ली एमसीडी के मुताबिक जिन व्यावसायिक वाहनों को दिल्ली में प्रवेश करना है, उन पर शुक्रवार दिन में ही टैग लगाना होगा। अब तक एक लाख 35 हजार से अधिक आरएफआईडी टैग की बिक्री हुई है।

जिन वाहन मालिकों ने टैग नहीं लिया है वह टैग प्राप्त कर लें। 13 टोल नाकों के अलावा छह स्थान चिह्नित किए गए हैं, जहां से टैग प्राप्त किया जा सकता है। गौरतलब है कि ट्रांसपोर्टर यूनियन की अपील पर एमसीडी ने 16 अगस्त से समय सीमा ढ़ाकर 23 अगस्त कर दिया था।

बिना टैग प्रवेश करने पर भारी जुर्माना
एमसीडी ने व्यावसायिक वाहन मालिकों को चेतावनी दी है कि बिना टैग के वाहन दिल्ली में प्रवेश करेंगे, तो उन्हें पहले सप्ताह जुर्माने के तौर पर निर्धारित पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क और टोल राशि का दोगुना भुगतान करना होगा। नियम लागू होने के दूसरे सप्ताह में प्रवेश करते हैं, तो उन्हें पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क के साथ टोल राशि का तीन गुना भुगतान करना होगा और तीसरे सप्ताह पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क के साथ टोल राशि का छह गुना देना होगा।

क्या होगा फायदा
दिल्ली में व्यावसायिक वाहनों के प्रवेश के लिए आरएफआईडी टैग लगने से टोल पर जाम की समस्या नहीं होगी। टोल वसूलने का काम ऑटोमैटिक हो जाएगा। अभी तीन से पांच मिनट का समय लगता है। टैग लग जाने के बाद कुछ सेकेंड में ही वाहन टोल से दिल्ली में प्रवेश कर जाएंगे। इससे जाम नहीं लगने के साथ ही प्रदूषण भी कम होगा।

भागने पर 10 गुना टोल वसूला जाएगा
कोई वाहन चालक टोल दिए बगैर भागता है और उसकी पहचान हो जाती है तो उससे दस गुना टोल वसूला जाएगा। इस टैग से सभी व्यावसायिक वाहनों की निगरानी हो सकेगी। शुक्रवार रात से टोल के सभी नाकों पर ऑनलाइन व्यवस्था हो जाएगी। यह पता लग जाएगा कि कौन से वाहन ने कब और कितने बजे दिल्ली में प्रवेश किया।

क्या है आरएफआईडी टैग
आरएफआईडी टैग वाहन के ऊपर चिपका दिया जाता है। इसमें एक चिप लगी रहती है, जिसमें वाहन का पूरा विवरण ही नहीं, वाहन मालिक का पता और संपर्क नंबर भी रहता है। टैग लगा हुआ वाहन जैसे ही टोल पर पहुंचता है, तो वहां लगे गेट पर टैग स्कैन हो जाता है। पंजीकृत खाते से टोल की राशि भी ऑटोमैटिक वसूल ली जाती है। इसे रिचार्ज कराना पड़ता है।

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