हिमालयी क्षेत्र की वनोषधियों पर राष्ट्रीय संगोष्ठी

देहरादून (महानाद) : आज दिनांक 10 नवंबर को होटल पर्ल ग्रैंड में उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय, राज्य औषधीय पादप बोर्ड एवं आरोग्य भारती के संयुक्त तत्वावधान में लोक स्वास्थ्य परम्परा में हिमालयी क्षेत्र की वनोषधियां विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

संगोष्ठी में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मुख्य अतिथि एवं कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ रमेश गौतम राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आरोग्य भारती ने की एवं मंच संचालन आदित्य कुमार जी द्वारा किया गया।

डॉ नृपेंद्र चौहान सीईओ राज्य औषधीय पादप बोर्ड एवं निदेशक सगन्ध पौधा केंद्र द्वारा कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए वर्तमान राज्य सरकार द्वारा जड़ी बूटियों पर विशेष जोर दिये जाने हेतु धन्यवाद दिया। उनके द्वारा बताया गया कि जड़ी बूटी शोध संस्थान गोपेश्वर एवं सगन्ध पौधा केंद्र देहरादून व्यवसायिक रूप से किसानो की मदद कर रहे है। आज इन संस्थानों का 120 करोड़ का वार्षिक टर्नओवर है एवं लगभग 40000 किसान इन संस्थानों से जुड़े हैं जो कई प्रकार की जड़ी बूटियों की खेती कर रहे हैं।

आयुर्वेद विश्वविद्यालय की कुलसचिव प्रो माधवी गोस्वामी द्वारा विश्वविद्यालय की वर्तमान गतिविधियों एवं जड़ी बूटियों के क्षेत्र में विश्वविद्यालय के विज़न के बारे में मुख्यमंत्री को अवगत कराया। उन्होंने विश्वविद्यालय में बड़े स्तर पर हर्बल गार्डन के निर्माण पर जोर दिया।

आरोग्य भारती के अध्यक्ष एवं अन्य पदाधिकारियों द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर संगठन द्वारा स्वास्थ्य रक्षण हेतु किये जा रहे प्रयासों के बारे में उपस्थित लोगों को बताया।

कृषि मंत्री द्वारा प्रदेश में कृषिकरण हेतु किसानों को और अधिक सुविधायें दिए जाने पर सरकार की प्रतिबद्धता पर बात रखी। साथ ही उनके द्वारा मुख्यमंत्री से जड़ी बूटी शोध संस्थान एवं सगन्ध पौधा केंद्र को औषधीय पौधों की कृषिकरण हेतु अधिक जमीन दिये जाने का आग्रह किया गया।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत द्वारा सरकार के द्वारा जड़ी बूटी के क्षेत्र में किये जाने वाले प्रयासों के बारे में लोगों को अवगत कराया। उन्होंने आक एवं भाँग जैसे औषधीय पौधों पर शोध किये जाने पर जोर दिया। उनके द्वारा बताया गया कि आज हींग अफगानिस्तान से आयात की जा रही है जबकि उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र उत्कृष्ठ क्वालिटी की हींग उगाने के लिए सबसे उपयुक्त है इस क्षेत्र में कार्य किये जाने की आवश्यकता है।

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में कई विख्यात वैद्यों एवं वैज्ञानिकों द्वारा अपनी बात रखी एवं शोध पत्र पढ़े। जड़ी बूटी शोध संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ विजय भट्ट द्वारा कई औषधीय पौधों के बारे में जानकारी दी गयी। आयुर्वेद विश्वविद्यालय के द्रव्यगुण विभाग द्वारा के प्रदर्शनी लगाई गई। जिसे कृषि मंत्री द्वारा बहुत सराहा गया।

संगोष्ठी के आयोजन में आयुर्वेद विश्वविद्यालय के प्रो अरुण त्रिपाठी, प्रो अनूप गक्खड़, प्रो राधा बल्लभ सती, डॉ प्रदीप गुप्ता, डॉ राजीव कुरेले, डॉ शैलेंद्र प्रधान, डॉ नवीन जोशी, डॉ दीपक सेमवाल, डॉ किरन वशिष्ठ, डॉ इला तन्ना, डॉ वर्षा सक्सेना, डॉ प्रबोध यरावर, चंद्रमोहन पैन्यूली आदि ने मुख्य भूमिका निभाई।

राज्य औषधीय पादप बोर्ड के डॉ नरेंद्र बिष्ट, अंकित नेगी, रेशमा दीवान, ज्योति वर्मन, डॉली चौहान, सुंदर लाल आदि द्वारा सहयोग किया गया।

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