पैरालिसिस को मात देकर मिसेज इंडिया वर्ल्ड वाइड बनी हिना कौसर

कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो तो मंजिल मुश्किल नही

प्रदीप फुटेला
गदरपुर (महानाद) : खुदी को कर बुलंद इतना हर तकदीर से पहले,खुदा बन्दे से पूछे तेरी रजा क्या है।

अगर दिल मे कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो तो कामयाबी कदम चूमती है। यह कहावत चरितार्थ की है मिसेज इंडिया वर्ल्ड वाइड की फाइनलिस्ट हिना कौसर ने। हिना कौसर ने पैरालिसिस जैसी बीमारी को भी चुनौती देते हुए एक ऐसा मुकाम हांसिल किया है जिसकी हर कोई चाहत रखता है।

आम तौर पर ऐसी बीमारी होने पर इंसान के सारे सपने बिखर जाते है तथा वह ताउम्र दुसरो पर आश्रित हो जाता है लेकिन हिना कौसर ने ऐसी गंभीर बीमारी को मात देकर खुद अपनी मंजिल तलाश की है। करीब एक साल तक बीमारी से जूझने के बाद उसके सामने खुद को साबित करने की चुनौती थी।

हिना कौसर का जन्म पटना में हुआ था। बीसीए, एमबीए की पढ़ाई करने के बाद हिना ने कला के क्षेत्र में भाग्य आजमाने का निर्णय लिया खासतौर पर पेंटिंग, कढ़ाई, सिलाई उनका पसन्दीदा क्षेत्र था। परंतु हिना के पापा उसे डॉक्टर बनाना चाहते थे। हिना ने अपनी मंज़िल खुद तलाशने का निर्णय लिया। एमबीए के बाद वह मेट्रो रेल में एचआर के पद पर सलेक्ट हो गयी। इनके पति भी मेट्रो में कार्यरत है। इसके बाद हिना एक बड़े हादसे से गुजरी उन्हें पैरालिसिस का अटेक हुआ जिससे उसकी जिंदगी अस्त व्यस्त हो गयी। हिना को डॉक्टरों ने जबाब दे दिया तथा कहा कि अब पूरी जिंदगी ऐसे ही काटनी पड़ेगी। लेकिन उसने हिम्मत नही हारी तथा होंसले व जज्बे के साथ संघर्ष जारी रखा।

आखिरकार उसकी मेहनत रंग लाई उसके पैरालाइसिस हुए हिस्से ने पुनः काम करना शुरू कर दिया। बाद में हिना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भरत नाटयम डांसर के तौर पर खुद को स्थापित किया। यही नही फैशन की कई स्पर्धाओं में भाग लेकर अपने लिए जगह बनाई। वह मिसेज इंडिया में फाइनलिस्ट भी बनी जो कि ग्रीस में आयोजित हुआ था। हिना का हौंसला तो देखिए बाड़ी में एक मेंटल व चार स्क्रुस है। हिना का कहना है कि उनके जो सपने थे अब वह उन सपनों को पूरा कर रही है। उसने अपनी चार वर्षीय बेटी को भी डांस सिखाना शुरू कर दिया है।

हिना सामाजिक कार्यो में भी बढ़चढ़ कर भागीदारी करती है। गरीब एवम असहाय लोगों की मदद करने में भी वह पीछे नही रहती। हिना ने बेस्ट ब्यूटी आइकॉन2019 भी अपने नाम किया है। हिना ने विभिन्न देशों में आयोजित सोंदर्य प्रतियोगिताओ में भी प्रतिभाग किया है। हिना एक मॉडल व एक्टर के तौर पर खुद को स्थापित कर चुकी है। उसका कहना है कि वह चाहती है कि दुनिया से जाने के बाद भी वह लोगो के दिलों में जिंदा रहे। इसके लिए वह हर कोई वह काम करती है जिससे उन्हें सुकून मिलता रहे। हिना का कहना है उसने कभी हारना नही सीखा। हर हार में उन्हें जीत दिखती है। हार ही मुझे जीत के लिए प्रेरणा देती है।

हिना के पिता नेमतुल्लाह अंसारी जो कि पेशे से इंजीनियर थे। वह 5 माह पूर्व दुनिया से विदा हो गए है। वह अपने पिता को अपना गुरु व आदर्श मानती है। हिना ने बताया कि वह मुस्लिम समाज से है। जबकि उनके पति देवेंद्र सोनी हिन्दू है। वह आईटी इंजीनियर है। उनकी अरेंज मैरिज हुई थी। उनके बीच मे कभी भी धर्म नही आया। सभी त्यौहार ईद, होली, दिवाली, दुर्गापूजा सभी मिलजुलकर मनाते हैं। सात भाई बहनों में वह सबसे छोटी बेटी है इसलिए परिवार में सभी को मुझसे ज्यादा उम्मीद थी वह उन उम्मीदों पर खरा उतर पाऊँ इसका हरसंभव प्रयास किया है। हिना अपनी बेटी के लिए वह रोल मॉडल बनना चाहती है।

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