हेलमेट मैन ने निकाली पुराने हेलमेट की अर्थी

नोएडा (महानाद) : हेलमेट मैन की सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता यात्रा पुराने हेलमेट की अर्थी को ट्रैफिक कार्यालय नोएडा सेक्टर 14A से डीसीपी राजेश एस ने हरी झंडी दिखाई. और इस अभियान को महत्वपूर्ण बताया जो लोगों को जागरूक करने का एक अनोखा प्रयास है.

हेलमेट मैन राघवेंद्र कुमार ने आज नोएडा में पुराने हेलमेट की अर्थी को लेकर 12 किलोमीटर की यात्रा की.जो पूरे दिल्ली एनसीआर को जागरूकता का संदेश देते हुए 16 फरवरी को इंडिया गेट से राजघाट पर समाप्ति होगी. जो गौतम बुध नगर से अपर जिला अधिकारी दिवाकर सिंह ने भी हरी झंडी दिखाई थी.

हेलमेट मैन ने बताया इसका उद्देश्य जो प्रतिवर्ष डेढ़ लाख लोगों की मौत हो रही है जो नए कानून के बावजूद भी सड़क दुर्घटना में मरने वाले लोगों की संख्या बराबर है. सड़क दुर्घटना के प्रति लोगों को जागरूक करने का कार्य पिछले 6 साल से हेलमेट मैन कर रहे हैं और अब तक 25 हजार हेलमेट देकर 2 लाख गरीब बच्चों को निशुल्क किताबें दे चुके हैं. इस अभियान से भारत के सभी माता-पिता को संदेश देना चाहते हैं सड़क दुर्घटना में प्रति वर्ष डेढ़ लाख लोगों की मौत होती है उसमें पचास हजार ऐसे युवा होते हैं जो अपने घर के चिराग होते हैं. और आज यह समस्या भारत में कोरोना वायरस से भी ज्यादा खतरनाक हो गया है जो लोगों को दिखाई नहीं दे पा रहा है. क्योंकि सड़क दुर्घटना में होने वाली मौत से भारत के नागरिकों के लिए चिंता का विषय नहीं रहता है और हर दिन लाखों लोग ट्रैफिक नियम तोड़ते रहते हैं. और भारत के नागरिकों के किसी अपनों की सड़क दुर्घटना में मौत होती है तो पुलिस और सरकार को जिम्मेदार मानते हैं और उन्हें सिर्फ कोसते रहते हैं जीवन भर लेकिन सड़क पर उस घटना से सीख लेकर दूसरों को जागरूक करने के लिए बहुत कम लोग हैं जो ऐसा सोच पाते हैं कार्य करने की तो दूर की बात है.

आज यही संदेश भारत के हेलमेट मैन अपने अभियान द्वारा भारत के सभी नागरिकों को सड़क दुर्घटना के लिए जागरूक कर रहे हैं. उसके लिए भारत सरकार से सभी स्कूलों में हेलमेट देने का नियम की मांग भी कर रहे हैं. जो पिछले साल ही भारत सरकार ने 4 वर्ष के ऊपर के उम्र के बच्चों को बाइक पर बैठने की इजाजत दी लेकिन उस बच्चे के सर में हेलमेट भी होना चाहिए उसके लिए कानून पास की. लेकिन भारत में प्रतिदिन लाखों पेरेंट्स बच्चों को स्कूल छोड़ने जाते हैं बच्चे के सर में हेलमेट तो दूर की बात वह खुद भी हेलमेट लगाकर नियमों का पालन नहीं करते हैं. किसी चीज को गंभीरता से देखते हुए भविष्य में जब यह बच्चे बड़े हो तो उन्हें जागरूक करने के लिए सरकार को या किसी ट्रैफिक पुलिस को उन्हें जागरूक करने के लिए सड़क पर आने की जरूरत नहीं पड़ेगी. जब उन्हें बचपन से ही पहली कक्षा में एडमिशन होने वक्त जो स्कूल द्वारा झोला जूते ब्लेजर स्कूल ड्रेस दी जाती है उसी समय एक हेलमेट देने का भी कानून होना चाहिए. जब यही बच्चे बड़े होकर कॉलेज में दाखिला लेते हैं कॉलेज में भी एडमिशन वक्त एक हेलमेट देने का नियम होना चाहिए. क्योंकि भारत में प्रति वर्ष सड़क दुर्घटना में 79 प्रतिशत युवा की डेथ होती है. जो हमारे देश के लिए यह बहुत गंभीर समस्या है. पिछले 6 साल में हेलमेट मैन ने कई तरह से अभियान चलाकर सरकार और जनता को जागरूक होने का संदेश दे रहे हैं. लेकिन दुख इस बात का है भारत सरकार समाज को जागरूक करने वालों के प्रति नहीं सोच पा रही है बहुत चिंता का विषय है. और आज ऐसे भारत में बहुत कम गिने चुने लोग हैं जो इस तरह का अभियान चलाकर देश को जागरूक करने का काम कर रहे हैं. जो अपने मिशन को पूरा करने के लिए अपने घर तक भी बेच दिया.

आज देश की हालत ऐसी है कोई सड़क पर मरता है और सड़क जाम कर देता है उसके लिए तुरंत 10 लाख के मुआवजे दे दी जाती है. इससे यही पता चलता है भारत सरकार सिर्फ मुर्दों के लिए है इंसानों के लिए तो उसके पास समय ही नहीं है. क्योंकि मुर्दा में उसे अपनी राजनीति और वोट बैंक दिखता है. और इसका परिणाम आज ऐसा हो गया है जिसके घर के चिराग बुझ गए हैं उनसे कोई मिलना नहीं चाहता और ना ही अपने आप को बदलना चाहता है.

आज कार्यक्रम में गौरव कुमार धनलक्ष्मी सिंह मुकुंद सिंह गौरव सिंह अमित सिंह राणा शुभम सिंह विकास पांडे राघव झा दयानंद चौधरी. अभिषेक झा
प्रियवृत्त परमार, प्रवीण कुमार भारतीय मनीष कुमार. सौरभ सत्यम बघेल , मोहन यादव , अमित चौरसिया , नदीम खान , कैफ, प्रियांशु गुप्ता मौजूद रहे.

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