अब आयुर्वेदिक चिकित्सक भी कर सकेंगे सर्जरी

अब आयुर्वेदिक चिकित्सक भी कर सकेंगे सर्जरी

नई दिल्ली (महानाद) : आयुर्वेदिक चिकित्सक भी मरीजों की सामान्य सर्जरी कर सकेंगे। भारत सरकार ने आयुर्वेद के स्नातकोत्तर (पीजी) छात्रों को सामान्य सर्जरी की अनुमति दे दी है। इसके तहत उक्त चिकित्सक हड्डी रोग,नाक-कान-गला (ईएनटी), नेत्र विज्ञान, और दांतों से जुड़ी सर्जरी कर पायेंगे।

केन्द्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अअनुसार आयुर्वेदिक पढ़ाई के पाठ्यक्रम में सर्जिकल प्रक्रिया के लिए प्रशिक्षण माॅड्यूल को जोड़ा जाएगा। इसके लिए अधिनियम का नाम बदलकर भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद (स्नातकोत्तर आयुर्वेद शिक्षा) संशोधन विनियम, 2020 कर दिया गया है।

बता दें कि देश में आयुष चिकित्सा की प्रैक्टिस कर रहे डाॅक्टरों द्वारा एलोपैथी के समान अधिकार देने की मांग की जाती रही थी। नए अधिनियम के मुताबिक, आयुर्वेद के छात्रों को पढ़ाई के दौरान शल्य (सर्जरी) और शालक्य चिकित्सा की ट्रेनिंग दी जायेगी। छात्रों को शल्य चिकित्सा की दो विधओं में प्रशिक्षण दिया जाएगा और उन्हें एमएस (आयुर्वेद) जनरल सर्जरी और एमएस (आयुर्वेद) शालक्य तंत्र (नेत्र, कान, नाक, गला, सिर और सिर-दंत चिकित्सा का रोग) जैसी शल्य तंत्र की उपाधियों से सम्मानित किया जाएगा।

इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (आयुष) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डाॅ. आरपी पाराशर ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने आयुष चिकित्सा को बढ़ावा देने को लेकर शुरू से ही बेहतर कार्य किया है। नया आदेश के तहत वर्तमान में देश की चिकित्सीय व्यवस्था के लिए बेहतर साबित होगा।

डाॅ. पाराशर का कहना है कि विश्व के पहले सर्जन सुश्रुत थे जो आयुर्वेद चिकित्सा से जुड़े थे। विश्व में सर्जरी आयुर्वेद की ही देन है। ऐसे में सरकार अनुमति देती भी है तो इससे किसी भी पैथी को संकट नहीं है। यह अधिकार आयुर्वेद का है और उसे अब मोदी सरकार ने दिलाया है।

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