अगस्त माह का राशिफल पं. गोविन्दराम की कलम से

मेष (चू, चे, चौ, ला, ली, लू, ले, लो, अ) : अगस्त 15 तक मंगल द्वादशस्थ होने से परिवारिक उलझनें व आकस्मिक खर्च बढ़ेंगे। अत्याधिक कठिन संघर्ष के बाद भी धन लाभ कम रहेगा। ता.10 से मंगल स्वराशिगत (मेष) होने से निर्वाह योग्य धन लाभ के अवसर प्राप्त होते रहेंगे। परन्तु मनोरंजन एवं विलासित कार्या पर खर्च अधिक रहेंगे।
उपाय – नित्य 25 दिनों तक श्रीविश्वनाथ मंगल स्त्रोत का पाठ करें, शुभ रहेगा।

वृष (ई, उ, ए, ओ, वा, वि, वु, वे, बो) : व्यवसायिक क्षेत्र में अनेक उतार चढ़ाव एवं संघर्ष का सामना रहेगा। कुछ आर्थिक परेशानियां भी बनी रहेंगी। मानसिक तनाव एवं निकट बन्धुओं से तकरार होगी। सिर दर्द एवं आंखों में कष्ट की संभावना बनी रहेगी।
उपाय – 1 से 15 ता. तक सिर्फ महाकाल स्तुति का पाठ करें, शुभ रहेगा।

मिथुन (क, की, कु, घ, ड, छ, के, को, ह) : शुक्र राहू योग रहने से पारिवारिक एवं आर्थिक स्थिति अनिश्चित रहेगी। गुप्त परेशानी, शत्रु भय एवं शरीर कष्ट के योग हैं। अनावश्यक कार्या पर धन का खर्च अधिक होगा। स्वास्थ्य नर्म, पेट विकार, व्यर्थ के झगड़े, वाद-विवाद में परेशानी के योग बनेंगे। सावधानी बरतें।
उपाय – श्री बंगलामुखी स्त्रोत का नित्य 21 दिनों तक पाठ करें, शुभ रहेगा।

कर्क (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो) : मासारम्भ में सूर्य-बुध का संचार होने से घरेलू एवं आर्थिक परेशानियां बनी रहेंगी। क्रोध एवं उत्तेजना से बचें। मानसिक तनाव व क्रोध की भावना अधिक होगी। भाई बन्धुओं से मन मुटाव, स्वास्थ्य में गड़बड़ी उत्पन्न हो, मासान्त में कोई शुभ समाचार प्राप्त होगा।
उपाय – 21 दिनों तक राम रक्षा स्त्रोत का पाठ करें, शुभ रहेगा।

सिंह (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे) : मासारम्भ में यद्यपि गुरू की दृष्टि होने से धर्म कर्म की ओर रूचि होगी एवं किसी शुभ कार्य पर धन खर्च होगा। परन्तु सूर्य द्वादशस्थ होने से कठिनाई से धन प्राप्ति के साधन बनेंगे। ता. 16 के बाद दैनिक कार्या एवं सरकारी क्षेत्रों में रुके हुए कार्या में प्रगति होगी।
उपाय – सूर्य भगवान को अर्ध्य दे और नित्य 21 दिनों तक नित्य प्रातः 11+11 गांठे साबुत हल्दी की केले के पेड़ पर चढ़ाए, शुभ रहेगा।

कन्या (टो, प (प्र), पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो) : ता. 2 से 16 तक बुध लाभ स्थान में तथा ता. 15 तक मंगल की दृष्टि रहने से नौकरी में पदोन्नति कुछ रुकावटों के बाद ही पायेगी। कार्य व्यसाय में, आय में कमी रहेगी। ता. 7 से वृहद द्वादशस्थ होने से स्वास्थ्य नर्म रहेगा।
उपाय – नित्य 27 दिन तक मृत्युंजय स्त्रोत का पाठ करें, शुभ रहेगा।

तुला (री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते) : शुक्र भाग्यस्थ होने से विशेष संघर्ष एवं परिश्रम से ही आय के साधनों में वृद्धि होगी। कोई रुका हुआ कार्य बनेगा। मान प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। परन्तु राहू युक्त होने से कुछ कार्या में विलम्ब तथा स्वास्थ्य नर्म रहेगा।
उपाय – नित्य गणेश अथर्व शीर्ष का पाठ करें, शुभ रहेगा ।

वृश्चिक (तो, ना, नी, नू, ने, पा, पी, यू) : पूर्वार्द्ध में स्वास्थ्य में गड़बड़ी, रक्त, पित्त विकार, नेत्र पीड़ा एवं परिश्रम व उत्साह में कमी रहेगी। स्वभाव में क्रोध एवं चिड़चिड़ापन रहेगा। संयमपूर्ण व्यवहार करें। ता. 16 से मंगल की स्वगृही दृष्टि रहने से नए उच्चाधिकारियों के साथ सम्बंध बनेंगे। खर्च भी बढ़ेंगे।
उपाय – चार मंगलवार को 108+108 लौंग के फूलों की माला हनुमान जी को चढ़ायें, चमेली के तेल का दीपक जलाएं, शुभ रहेगा।

धनु (ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, डा) : कठिन परिस्थितियों के बावजूद निर्वाह योग्य आय के साधन बनते रहेंगे। परिवार में व्यर्थ की आर्थिक उलझनें बढ़ेंगी। निकटतम भाई बन्धुओं से मनमुटाव पैदा होगा। उत्तरा(र् में किसी विशिष्ट व्यक्ति से मुलाकात होगी। धार्मिक कार्या की ओर रूचि बढ़ेगी।
उपाय – नित्य 11 दिन तक गणेश भगवान को मोदक का प्रसाद चढ़ायें, शुभ रहेगा।

मकर (भे, ज, जी, जू, जे, जो, ख, खी, खू, खे, खो, ग, गी) : सरकारी क्षेत्र में रुकावटें पैदा होने की संभावनाएं होगी। आय के साथ-साथ खर्च भी बहुत होंगे। वृथा मानसिक तनाव एवं स्वभाव में तेजी रहेगी। शत्रु विवाद भी रहेगा। अधिक विश्वास न करें धोखा भी हो सकता है।
उपाय – पीली चीजों का दान करें, बृहस्पतिवार को चने की दाल और केला फल ना खायें, शुभ रहेगा।

कुंभ (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा) : द्वितीयस्थ मंगल पर शनि की विशेष तृतीय दृष्टि होने से कार्य व्यवसाय सम्बंधी विशेष परेशानियां होगी। निकटस्थ बन्धुओं से भी मनमुटाव या तकरार की स्थिति बनेगी। वृथा खर्च अधिक होंगे।
उपाय – नित्य चार मंगवार को सुंदर काण्ड का पाठ करें, शुभ रहेगा, बिगड़े कार्य भी बनेंगे।

मीन (दी, दू, थ, झ, दे, दो, चा, ची) : भाग्येश मंगल लग्न तथा द्वितीयस्थ तथा गुरू स्वराशिस्थ रहने से संघर्षपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद व्यवसायिक क्षेत्रों में धन लाभ व उन्नति के योग हैं। व्यवसायिक व्यवस्थाएं बढ़ेंगी, धर्म एवं अध्यात्मिक क्षेत्र में रुझान बढ़ेगा। अचानक धन प्राप्ति के साधन बढ़ेंगे।
उपाय – नित्य श्री सूक्त का पाठ करें पूर्णिमा का व्रत रखें, शुभ रहेगा।

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