फाईनेन्स कम्पनियां दे रही हैं 0% ब्याज पर सामान खरीदने के मौके, क्या हैं इसके फायदे और नुकसान

कमल कृष्ण
महानाद डेस्क : आजकल कई फाईनेन्स कम्पनियां आपको दे रही हैं 0ø ब्याज पर आपके मनपसन्द मोबाइल, टीवी, फ्रिज, एसी आदि सामान खरीदने के मौके। लेकिन एक आम आदमी को आमतौर पर यह बात समझ में नहीं आती है कि ये 0ø ब्याज वाली कंपनी की स्कीम उसके लिए फायदेमंद है या नुकसानदेह। इसलिए हम आपको दे रहे हैं आपको इसके बारे में विस्तृत जानकारी जिसके बाद आप निर्णय कर पायेंगे कि क्या हमें यह 0ø फाईनेन्स करने वाली कंपनी चाहे वह एचडीएफसी हो, इण्डिया फस्र्ट कैपीटल या बजाज। कोई भी ऐसी जो 0ø फाईनेन्स की बात करते हैं। उसके बारे में बहुत अच्छी जानकारी हो जायेगी। आप निर्णय ले पायेंगे कि हमें उनसे फाईनेन्स लेना चाहिए या नहीं और ये डिपेन्ड करता है कि आपकी जरूरत क्या है आप क्या लेना चाहते हैं। कितने समय के लिए लेना चाहते हैं क्या अभी आपको जरूरत है या नहीं है। क्या आप उस पर ब्याज देना पसंद करेंगे या नहीं करेंगे।

तो सबसे पहले हम बात करते हैं 0ø ब्याज की। जी हाँ बिल्कुल 0ः ब्याज। यानि ब्याज के नाम पर 0ः लेते हैं। कई सारी स्कीम ऐसी हैं जो उनके प्रयोग में नहीं आती है या जिसमें अमाउण्ट कम होता है या ऐसे आइटम होते हैं जो उनके लिस्ट में नहीं हैं तो उस पर वह 0ः फाईनेन्स नहीं करते और साफ-साफ आपको बता देते हैं। इसमें 5ः, 6ः या 4ः का ब्याज लगेगा। अब 0ः की बात करते हैं बिल्कुल इसमें 0ः बोलते हैं उसमें कोई: ब्याज नहीं लेते लेकिन आपसे कुछ ऐसे खर्चे लेते हैं। अगर आप उसको फाईनेन्सली केलकुलेट करेंगे तो आपको ऐसा लगेगा कि आप उस पर ब्याज ही दे रहे हैं।

मैं 2010 से जो बजाज फाईनेन्स है और जो 0ः वाले होते हैं मैं उसमें एक्सपीरियन्स के लिए घर में कोई सामान खरीदने के लिए उसका इस्तेमाल करते आया हूँ और इन दस सालों में बहुत बड़ा परिवर्तन आ गया है। उस समय केवल एक फाइल प्रोसेसिंग फीस ली जाती थी और 0ः में आपका फाईनेन्स हो जाता था। लेकिन समय बदलता गया।

तो इसमें कौन-कौन से वो खर्चे हैं जो आपको ब्याज जैसा महसूस करते हैं। सबसे पहला होता है आपके लोन की प्रोसेसिंग फीस जो कि आमतौर पर 2ः या 3ः होती है। 400 से लेकर 800, 1000 तक भी होती है। दूसरी फीस इसमें ली जाती है जो भी आप आइटम खरीद रहे हैं उसका इंश्योरेंस। कई सारे आइटमों में कम्पनी ने इंश्योरेंस मेन्डेटरी किया हुआ है। जैसे खासखर से मोबाइल में। वो जो आपका इंश्योरेंस है उसके फायदे भी हैं नुकसान भी हैं। फायदा यह है कि जब तक आपका लोन चलेगा 8 या 10 ईएमआई में तब तक आपको थोड़ा सा चिन्ता नहीं करनी है कि यह टूट जाए या फूट जाए। वो डिपेन्ड करता है कि उस कम्पनी की कौन-कौन सी कन्डिशन में आपको इंश्योरेंस कवरेज मिलेगा। जो कि लगभग 1ः प्रति महीने के आस-पास होता है। यानि आप 20,000 का सामान ले रहे हैं तो लगभग 200 रु पर महीना आपका जो इंश्योरेंस है उसकी प्रीमियम और वो मेन्डेटरी है बिल्कुल।

अगली बात आती है अगर फाईनेन्स पर लेते हैं जिस पर 0ः न हो करके ब्याज है तो उस 4ः, 6ः जो भी है वो देना पड़ता है। अगर मैं उदाहरण की बात करूँ। अभी मैं परसों गया था मोबाइल के बारे में जानकारी करने लगभग 17,500 रु का मोबाइल उसमें 197 प्रति महीना 8 महीने लिए आपका इंश्योरेंस जा रहा था। 400 रु प्रोसेसिंग फीस जा रही थी। तो लगभग 2050 रु या 2000 रु के आस-पास उसमें एडिशनल फाईनेंस चार्ज, जिसमें से आपको लगभग 30ः यानि 7000 रु एडवांस देने थे। इसका मतलब ये हुआ कि 17500 रु के आइटम पर 7,000 रु देने के बाद केवल 10,500 रु का फायदा या यूँ कहिए कि फण्ड आपको कम्पनी ने दिया। उस 7500 रु के बदले आपको लगभग 400 रु प्रोसेसिंग फीस और इंश्योरेंस की जो प्रीमियम है वो भी आपको देनी पड़ी। तो इसका मतलब ये हुआ कि 0ः महसूस होता है लेकिन असल में नहीं है।

अब बात आ रही है फिर भी आपको क्यों लेना चाहिए। जब भी आप ऐसा फाईनेंस करने जाएँ तो दो-तीन कम्पनियाँ जो हैं सबके बारे में पूछिए क्योंकि हर कम्पनी की स्कीम में प्रोसेसिंग फीस, इंश्योरेंस के क्लोज और ब्याज अलग-अलग होते हैं। तो पहली सावधानी आप ये लेंगे।

दूसरी बात, आपको लेना चाहिए या नहीं लेना चाहिए।
देखिए आपका लेना या नहीं लेना इन बातों पर निर्भर करता है। सबसे पहले आपकी जरूरत, आपके पास उपलब्ध रुपये, आप कितनी काॅस्ट बीयर कर सकते हैं। क्या आपको चीज आज ही लेनी है या कुछ दिनों तक रुक कर सकते हैं। देखिए जब आपको आज ही लेनी है तो, तो एस जरिया हो सकता है कि आपको वो चीज लेनी है। वो आर्टिकल या आइटम कैसे ने कैसे करके लेना चाहते हैं तो इसी तरह से आप ले सकते हैं।
दूसरी बात, मेरी सलाह इसमें ये है। वो कम्पनी 7 या 8 महीने की आपकी ईएमआई बनाती है। तो आप क्या करें। आप 7-8 महीने की ईएमआई के बजाए वो पैसा 2,000 रु कह लीजिए महीने का या 3,000 रु कह लीजिए। 6 महीने तक इकट्ठा कर लें। तो उस पैसे को अगर आप कैश या एकाउण्ट पेय करते हैं। तो कम्पनी आपको उस प्राइस पर भी 500-600 रु कम करके दे देगी। ये तब है जब आप 6 महीने तक रुक सकते हैं। दूसरी बात अगर आपके खाते में कहीं पैसा पड़ा हुआ है वो आपको 6 महीने तक प्रयोग नहीं करना है तो कभी-भी फाईनेन्स स्कीम इस्तेमाल नहीं करनी चाहिए।
अब इसमें एक ऐसा पाइण्ट है कि क्यूँ जबरदस्ती हम ब्याज भी दें, प्रोसेसिंग फीस भी दें और फिर भी फाईनेन्स कराएँ। देखिए जिन लोगों ने आज तक लोन नहीं लिया होता है उनके सिविल रिपोर्ट -1 आती है। और अगर आपको अपने सिविल रिपोर्ट में कुछ स्कोरिंग करनी है और आगे फाईनेन्स में उसका कुछ फायदा लेना है तो ये जो 1000-1500 या 2000 रु एकस्ट्रा देना है वो दे दीजिए। फोर द पीरियड आफ ऐट मन्थ। और आपका सिविल रिपोर्ट शुरु हो जाएगा। आपकी रिपेमेन्ट अगर बिना डिफाल्ट के होती है तो उस बिना डिफाल्ड के रिपेमेन्ट में आपका सिविल धीरे-धीरे अच्छा होगा। कल को आप अगर नया लोन लेना चाहते हैं तो आपका लोन जल्दी प्रोसेसिंग हो जाएगी।
आपको ऐसे किसी भी लोन को लेने के लिए क्या-क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिए।
एक सबसे पहले आप दो-तीन कम्पनी की स्कीम जरूर पूछें। टेनोर के बारे में जरूर पूछें। इन्श्योरेंस के बारे में पूछें। ब्याज के बारे में पूछें। और सबसे बड़ी बात है अगर आपने कोई भी डिफाल्ट कर दिया तो उसके बारे में जरूर पूछिए।

देखिए उसके बारे में आप पूछेंगे तो उसमें बताएंगे की एक डिफाल्ट आपको 400 रु का पड़ेगा। आपके अकाउण्ट में तीन-चार दिन पहले फण्ड होना चाहिए। कई बार क्या होता है। आपने दो दिन पहले फण्ड डाला और ईसीएस भी एक-आद दिन पहले लग गई। आपका फण्ड भी रिफलेक्ट नहीं हुआ। कई सारी बातें हैं। खासकर जिस दिन ईएमआई लगनी हो उससे एक दिन पहले तो जरूर रखिए। क्योंकि ये प्रोसेसिंग रात में होती है। अगर आप सुबह करते हैं तो भी आपका ये ईसीएस बाउन्स हो सकता है। पर ईसीएस बाउन्स एक बार नहीं होता है। अगर आपने आज नहीं करा, कल भी नहीं करा हो सकता है कि दो बार बाउन्स हो जाए। तो इस खर्चे से बचने की कोशिश करिए। और जब भी आपका लोन बन्द हो जाए तो उसका मोडयूज लेने की कोशिश करिए। जब आप कोई आइटम लेते हैं तो उसका जो बिल होता हैं। कई सारे फाईनेन्सर आपको आॅरिजनल बिल नहीं देते हैं। जब आपको लोन पूरा हो जाए। तो अपना आॅरिजनल बिल जरूर ले लीजिएगा।

मैंने आपको सारी जानकारी दे दी कि ये स्कीम फायदेमन्द है या नुकसानदायक है। किनके लिए फायदेमन्द है किनके लिए नुकसानदायक है। लेनी चाहिए या नहीं लेनी चाहिए।

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