पुष्पांजलि कलश की आवश्यकता : शिवरत्न अग्रवाल

काशीपुर (महानाद) : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छता अभियान का खूब प्रचार ,प्रसार हुआ । जनता ने हृदय से अपनाया भी। सबसे बड़ा लाभ गृहणियों को हुआ, जो कूड़ा तथा पूजा -पाठ की सामग्री सड़क पर फैक दिया करते थे अथवा नदी -नाले में डाल दिया करते थे। घर का कूड़ा -कचरा नगरपालिका अथवा नगरनिगम की गाड़ियां घर -घर से लेने लगी। घरों के आगे सड़क की स्वच्छता को चार चाँद लगने लगे। परन्तु पूजा -सामग्री को मंदिरों में ,घरों में ,गुरद्वारों में अथवा जहाँ भी पूजा – अनुष्ठान होते हैं, उपयोग में लायी गयी पूजा सामग्री को कूड़ेदान में या नगरपालिका की गाड़ी में डालना उचित नहीं समझा। भले ही पूजा सामग्री नदियों में न डालकर खेतों में विसर्जित कर दी जाती हो। परन्तु विसर्जित की जाने वाली उस पूजा सामग्री का सदुप्रयोग नहीं हो पाता ।

वर्तमान की आवश्यकता है कि पूजा के वेस्ट को वेस्ट न कहकर उसे हम सोने में बदल दें । अतः वेस्ट का सदुप्रयोग करने के लिए हम उसे नया रूप देकर कोई उपयोगी वस्तु बना लें । और उपयोगी वस्तु बनाकर अपनी घरेलु आवश्यकता को पूरा कर लें । इस प्रकार पूजा सामग्री का अनादर भी नहीं हुआ और उसका उपयोग भी भलीभांति हो गया । पूजा सामग्री से विभिन्न उत्पाद बनाने में कुछ व्यक्तियों को रोजगार भी मिलेगा । पूजा सामग्री से बनाये जाने वाले विभिन्न उत्पाद समाज में मान्यता प्राप्त करते जा रहे हैं। इस प्रकार उपयोग में लायी गयी पूजा सामग्री के वेस्ट को हम नदी -नालों में व खेतों में डालकर प्रदूषण को बढ़ावा न देकर पर्यावरण संतुलन बनाये रखने में सहयोग तो प्रदान कर ही रहें हैं।

पूजा सामग्री को आदर सहित विसर्जित करने के लिए पुष्पांजलि प्रवाह कलश बनाया गया है। जिसमें लगभग 2-3  कुंटल तक सामग्री आ जाती है। पुष्पांजलि प्रवाह कलश को पूजा स्थलों के पास स्थापित कर दिया जाता है। कॉलोनियों में साफ़ -सुथरे स्थान पर प्रत्येक परिवार की पहुंच में स्थापित कर दिया जाता है। नदी पर बने पुल के दोनों सिरों पर पुष्पांजलि प्रवाह कलश रख दिया जाता है। ताकि 2-व्हीलर और 4 -व्हीलर से आने वाले भक्तगण नदी के आरम्भ में ही रखे हुए कलश में पूजा सामग्री विसर्जित कर दें। जब कलश भर जाता है, तो उसको लेकर पूजा सामग्री के छटाई वाले स्थान पर पंहुचा दिया जाता है। कलश खाली करके पुनः उसी स्थान पर रख दिया जाता है। साथ ही कलश से प्राप्त पूजा सामग्री की छटाई करके सामग्री को नया रूप दे दिया जाता है। फिर वह उपयोगी हो जाती है। और हम उसे पूजा वेस्ट न कहकर अगर स्वर्ण का नाम दे दिया जाये तो अतिश्योक्ति नहीं होनी चाहिए।

पुष्पांजलि प्रवाह कलश के रखने से नदी में, नहरों में पूजा सामग्री के प्रवाह न करने से नदी /नहरों में बनने वाली कीचड़ नहीं बनेगी। कीचड़ नहीं बनेगी तो नदी का जल निर्मल रहेगा। जब जल निर्मल रहेगा तो शुद्ध पर्यावरण को बल मिलेगा।

अतः आप लोगों से करबृद्ध प्रार्थना है कि अपनी श्रद्धा से देवी -देवताओं को चढ़ाई गयी पूजासामग्री का सदुपयोग करने के लिए सामग्री को पुष्पांजलि प्रवाह कलश में ही विसर्जित करने का कष्ट करें। इसमें आप पर्यावरण का संरक्षण करते हुए समाज सुधार की भावना को प्रोत्साहित करेंगे। पुष्पांजलि प्रवाह कलश की स्थापना तथा पूजासामग्री से बनाये जाने वाले नए उत्पाद के कार्यक्रम को समाजहित में सुचारु रूप से चलाने के लिए आर्थिक सहयोग की भी अपेक्षा की जाती है।

-शिवरत्न अग्रवाल, संस्थापक “प्रयास “

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