वक्फ संशोधन विधेयक लोकसभा में पास, जानें क्या है विशेषताएं

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महानाद डेस्क : लंबी चर्चा के पश्चात रात्रि के 2 बजे वक्फ (संशोधन) विधेयक लोकसभा में पास हो गया। बिल के पक्ष में 288 तथा विरोध में 232 वोट पड़े।

आपको बता दें कि बुधवार की दोपहर को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश करते हुए कहा कि लोगों को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। एक कानून दूसरे कानून से ऊपर नहीं हो सकता। उधर, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने वक्फ संशोधन विधेयक पर अपना विरोध जताते हुए कहा कि यह वक्फ संपत्तियों के लिए लाभकारी होने के बजाय नुकसानदेह साबित होगा।

लोकसभा में चर्चा के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह वक्फ पर प्रस्तावित कानून नहीं मानने की धमकी दे रहे हैं, लेकिन यह संसद द्वारा पारित किया गया कानून होगा और इसे सभी को स्वीकार करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वोट बैंक की राजनीति के लिए यह डर फैलाया जा रहा है कि वक्फ विधेयक मुसलमानों के धार्मिक मामलों और उनके द्वारा दान की गई संपत्तियों में दखल है।

अमित शाह ने कहा कि इसके कानून का रूप लेने के बाद इसे पूर्व प्रभाव से लागू नहीं किया जाएगा, जबकि विपक्ष द्वारा मुस्लिम भाइयों को इस बहाने डराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल के एक सदस्य ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय इसे स्वीकार नहीं करेगा। यह क्या धमकी है… यह संसद का कानून है, सबको स्वीकार करना पड़ेगा। यह भारत सरकार का कानून है, हर एक के लिए बाध्यकारी है, इसे स्वीकार करना पड़ेगा।

वहीं, कांग्रेस नेता एवं नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने फेसबुक पर पोस्ट कर कहा कि वक्फ (संशोधन) विधेयक मुसलमानों को हाशिए पर धकेलने और उनके निजी कानूनों और संपत्ति के अधिकारों को हड़पने के उद्देश्य से बनाया गया एक हथियार है। आरएसएस, भाजपा और उनके सहयोगियों द्वारा संविधान पर यह हमला आज मुसलमानों पर लक्षित है, लेकिन भविष्य में अन्य समुदायों को निशाना बनाने के लिए एक मिसाल कायम करता है। कांग्रेस पार्टी इस कानून का कड़ा विरोध करती है क्योंकि यह भारत के मूल विचार पर हमला करता है और अनुच्छेद 25, धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करता है।

विधेयक की मुख्घ्य विशेषताएं –

– वक्फ (संशोधन) विधेयक केंद्रीय वक्फ परिषद और वक्फ बोर्ड्स की संरचना में बदलाव करता है ताकि उनमें गैर मुस्लिम सदस्यों को शामिल किया जा सके।
– सर्वेक्षण आयुक्त की जगह कलेक्टर को लाया गया है और उसे वक्फ संपत्तियों के सर्वेक्षण का अधिकार दिया गया है।
– वक्फ के तौर पर चिन्हित सरकारी संपत्तियां वक्फ नहीं रहेंगी। ऐसी संपत्तियों के स्वामित्व का निर्धारण कलेक्टर द्वारा किया जाएगा।
– ट्रिब्यूनल के निर्णय को अंतिम निर्णय मानने के प्रावधान को रद्द कर दिया गया है। बिल में उच्च न्यायालय में प्रत्यक्ष अपील का प्रावधान किया गया है।

आपको बता दें कि वक्फ को मुस्लिम कानून के अनुसार प्रबंधित किया जाता है। विधेयक राज्य वक्फ बोर्ड्स और केंद्रीय वक्फ परिषद में गैर मुस्लिम सदस्यों की अनुमति देता है और ऐसा करना अनिवार्य करता है। विधेयक ऐसे निकायों में मुख्यतया गैर मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने की जगह बनाता है। हिंदू और सिख बंदोबस्ती को प्रशासित करने वाले ऐसे संस्थानों में मुख्य रूप से उनके संबंधित धर्मों के सदस्य शामिल होते हैं।

वक्फ ट्रिब्यूनल्स से मुस्लिम कानून के विशेषज्ञों को हटाने से वक्फ संबंधी संपत्तियों का निवारण प्रभावित हो सकता है।

विधेयक वक्फ के निर्माण को कम से कम 5 वर्ष तक इस्लाम का पालन करने वाले व्यक्तियों तक सीमित करता है। इस मापदंड का तर्क अस्पष्ट है। यह प्रावधान 5 वर्ष से कम समय से इस्लाम का पालन करने वाले लोगों और ऐसा 5 वर्षों से अधिक समय तक करने वालों के बीच अंतर पैदा करता है।

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