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Thursday, February 19, 2026
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आरोप : नियमों के विरुद्ध जाकर प्रधानाचार्य को बनाया जिला समाज अधिकारी

रुद्रपुर (महानाद) : उधम सिंह नगर में नियमों के विरुद्ध जाकर एक प्रधानाचार्य को जिला साज अधिकारी बना दिया गया। जिस पर अपर समाज कल्याण अधिकारी ने सचिव को पत्र लिखकर इस नियुक्ति को रद्द करने की मांग की है।

अपर जिला समाज कल्याण अधिकारी मधुसूदन ने सचिव को पत्र लिखकर बताया कि किशोर कुमार गरसारी, प्रधानाध्यपक, राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालस (जनजाति) गोठी, जिला पिथौरागढ़ तथा जगीत सिंह, सहायक समाज कल्याण अधिकारी, सितारगंज को सहायक जिला समाज कल्याण अधिकारी उधम सिंह नगर का पद देते हुए जिला समाज कल्याण अधिकारी, नैनीताल के पद पर तैनाती दी गई है। उक्त तैनाती के सम्बन्ध में समाज कल्याण विभाग की विभागीय सेवा नियमावली के अनुसार जिला समाज कल्याण अधिकारी के पदों में तैनाती के लिए स्पष्ट व्याख्या दी गयी है । उक्त शासनादेश के अनुसार 50 प्रतिशत पद नियम 15 के अनुसार आयोग के माध्यम से सीधी भर्ती के द्वारा और 50 प्रतिशत पदों में मौलिक रूप से नियुक्त अपर जिला समाज कल्याण अधिकारी के पदों से 40 प्रतिशत तथा वृद्ध अशक्त आश्रम के 10 प्रतिशत आयोग के माध्यम से पदोन्नति से भरे जाने का प्राविधान है ।

मधुसूदन ने बताया कि 15 फरवरी, 2014 से उन्हें लोक सूचना अधिकारी के रूप में अपर जिला समाज कल्याण अधिकारी के पद का दायित्व सौंपा गया और आज तक अपर जिला समाज कल्याण अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। सेवा नियमों में स्पष्ट व्यवस्था होते हुए भी उन्हें जिला समाज कल्याण अधिकारी के पद पर न तो पदोन्नति दी गयी न ही तैनाती दी गयी है। शासन के द्वारा अपने ही आदेश का उलंघन करते हुए सेवा प्राविधान से इतर जनजाति कल्याण विभाग में प्रधानाध्यपक के पद पर कार्यरत व्यक्ति को जिला समाज कल्याण अधिकारी के पद पर जनपद उधम सिंह नगर में तैनाती दी गयी और यही नहीं कनिष्ठतम् सहायक समाज कल्याण अधिकारी के पद पर तैनात जगीत सिंह को सहायक जिला समाज कल्याण अधिकारी का पद देते हुए जिला समाज कल्याण अधिकारी के पद पर जनपद नैनीताल में तैनाती दे दी गयी ।

राम अवतार को अपर जिला समाज कल्याण अधिकारी के पद पर वर्ष 2012 में ही पदोन्नति दे दी गयी और वरिष्ठ कार्मिकों को इस पदोन्नति से वंचित रखा गया। इस विसंगति को दूर करने के लिए उन्होंने अपना प्रत्यावेदन प्रस्तुत किया परन्तु प्रस्तुत किये गये प्रत्यावेदन पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। इस प्रकार से हो रहे आदेशों से वरिष्ठ कर्मचारियों के कार्यक्षमता व मनोबल में प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

मधुसूदन ने तथ्यों के अनुसार संज्ञान लेते हुए उनकी वरिष्ठता पर विचार करने की मांग की है। उन्होंने नियम विरुद्ध नियुक्ति रद्द न करने और उन्हें पदोन्नत न करने पर हाईकोर्ट की शरण में जाने की बात कही है।

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