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Wednesday, March 25, 2026
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ब्रेकिंग न्यूज : मुलायम सिंह यादव की पुत्रवधु अपर्णा यादव ने थामा ‘कमल’, उत्तराखंड की हैं मूल निवासी

नई दिल्ली/ लखनऊ : मुलायम सिंह यादव की पुत्रवधु अपर्णा यादव आज भाजपा में शामिल हो गई। अपर्णा को दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय में यूपी बीजेपी के अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य तथा राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल बलूनी ने पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस मौके पर अपर्णा ने कहा कि वे प्रधानमंत्री मोदी के विचारों से प्रभावित हैं और उनके लिए राष्ट्रहित प्रथम है।
बता दें कि अपर्णा यादव सपा के पूर्व अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना यादव के बेटे प्रतीक यादव की पत्नी हैं। अपर्णा बिष्ट यादव उत्तर प्रदेश की एक सक्रिय राजनेता और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। सन 2011 में मुलायम के बेटे प्रतीक यादव से उनकी शादी हुई। उन्होंने 2017 में लखनऊ कैंट से विधानसभा चुनाव लड़ा था। लेकिन वह 33796 मतों के अंतर से रीता बहुगुणा जोशी से हार गई थीं। वह बीअवेयर के नाम से एक संगठन चलाती है, वह विशेष रूप से महिलाओं के अधिकारों और सशक्तिकरण के प्रति काम कर रही हैं।

अपर्णा का जन्म 1 जनवरी 1990 को हुआ था। अपर्णा ने मैनचेस्टर विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री पूरी की है। उन्होंने भातखंडे संगीत विश्वविद्यालय में नौ वर्षों तक शास्त्रीय संगीत में औपचारिक शिक्षा ग्रहण की है। वह ठुमरी की कला में विशिष्ट है। 2014 में जब उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान की प्रशंसा की थी तब वे लाइमलाइट में आयी थीं।

अपर्णा यादव मूल रूप से उत्तराखंड की रहने वाली हैं। इनके पिता अरविंद सिंह बिष्ट बड़े पत्रकार रहे हैं। अपर्णा के मुलायम के छोटे बेटे प्रतीक से प्यार की कहानी भी काफी दिलचस्प है। प्रतीक की मां साधना के बर्थडे के दिन पहली बार साल 2003 में अपर्णा को प्रतीक ने देखा था। प्रतीक की मां के कहने पर अपर्णा ने बर्थडे के मौके पर गीत गाया था। इसी गीत के बाद दोनों की दोस्ती गहरी हो गई।
प्रतीक ने इसके बाद मेल पर अपर्णा को ढेर सारे मैसेज भेजे थे। करीब पंद्रह दिन बाद अपर्णा ने प्रतीक के मैसेज पढे। उस वक्त अपर्णा दसवीं की पढ़ाई कर रही थी। आठ साल तक दोनों का प्यार बढ़ता रहा और फिर साल 2011 में परिवार की मंजूरी के बाद दोनों ने शादी कर ली।
प्रतीक और अपर्णा की शादी के मौके पर सैफई में बहुत बड़ा जश्न हुआ था। खास बात ये रही कि इस शादी के अगले ही साल समाजवादी पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला और यूपी में पहली बार अपने दम पर सरकार बनी।

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