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Thursday, February 19, 2026
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सपा नेता आजम खां छोड़ सकते हैं पार्टी, समर्थकों की नाराजगी से लग रही हैं अटकलें

रामपुर (महानाद): उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की राजनीति में बड़ी उथल पुथल होे सकती है। राजनैतिक गलियारों में सपा के कद्दावर नेता आजम खां के पार्टी छोड़ने की चर्चायें जोर पकड़ रही है। सूत्रों के अनुसार आजम खां की अखिलेश यादव से नाराजगी इस हद तक बढ़ चुकी है कि वे पार्टी छोड़ सकते हैं।

बता दें कि आजम खां इस समय रामपुर से समाजवादी पार्टी के विधायक हैं और सीतापुर जेल में बंद हैं। उन्होंने 2022 विधानसभा चुनाव जेल से ही लड़ा था। इन दिनों आजम खां के मीडिया सलाहकार फसाहत खान उर्फ शानू के जिस तरह के बयान सामने आ रहे हैं उससे अटकलें लगाई जा रही हैं कि आजम खां सपा छोड़ सकते हैं। रविवार को रामपुर में हुई पार्टी की बैठक में शानू ने कहा था कि सीएम योगी का बयान सही था कि अखिलेश नहीं चाहते कि आजम खान बाहर आएं।

शानू ने कहा कि आजम खां के आदेश पर रामपुर ही नहीं बल्कि आसपास के कई जिलों में सपा को वोट मिला। लेकिन हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यसदव ने मुसलमानों का पक्ष नहीं लिया। आजम खान 2 साल से ज्यादा समय से जेल में बंद हैं लेकिन अखिलेश यादव मात्र एक बार ही उनसे मिलने जेल गये हैं। न तो आजम खां को विपक्ष का नेता बनाया गया और न ही पार्टी में मुसमानों को अहमियत दी गई। उन्होंने कहा कि अब अखिलेश को हमारे कपड़ों से बू आ रही है।

बता दें कि आजम खां सपा के कद्दावर नेता हैं। वर्ष 1980 से वे रामपुर सीट से जीतते चले आ रहे हैं। केवल 1996 में उन्हें कांग्रेस के हाथों हार का मुंह देखना पड़ा था। उनकी पत्नी तंजीन फातिमा पूर्व विधायक 0और पूर्व राज्यसभा सांसद हैं। वहीं, उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खां रामपुर की स्वार सीट से विधायक चुने गये हैं। वर्ष 2019 में जब आजम खां ने रामपुर लोकसभा सीट जीतने के बाद रामपुर विधानसभा सीट छोड़ दी थी तो उपचुनाव में उनकी पत्नी फातिमा यहां से विधायक चुनी गई थीें। वहीं, 22 मार्च 2022 को आजम खां ने विधानसभा सीट बचाने के लिए रामपुर लोकसभा सीट से इस्तीफा दे दिया है।

बता दें कि मई 2009 में समाजवादी पार्टी ने उन्हें 6 साल के लिए पार्टी सेनिष्कासित कर दिया था। हालांकि दिसंबर 2010 में उनका निष्कासन वापस ले लिया गया और वे दोबारा पार्टी का हिस्सा बन गए।

वहीं आपको बता दें कि आजम खां खेमे की नाराजगी की खबर ऐसे समय में सामने आ रही है, जब अखिलेश यादव के चाचा एवं प्रगतिशील समाजवादी पार्टी-लोहिया प्रमुख शिवपाल यादव की भाजपा में जाने की चर्चा जोरो पर है।

इससे पहले सपा सांसद शफीकुर रहमान बर्क भी बयान दे चुके हैं कि कि वह अपनी पार्टी के काम से खुश नहीं हैं, ‘जो मुसलमानों के लिए पर्याप्त काम नहीं कर रही।’

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