महानाद डेस्क : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने रक्षा निर्यात के क्षेत्र में नया रिकॉर्ड बनाया है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश का रक्षा निर्यात बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये पहुंच गया है, जो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले करीब 62 प्रतिशत अधिक है। वर्ष 2013-14 में भारत का रक्षा निर्यात महज 686 करोड़ रुपये था। इस तरह एक दशक से अधिक समय में भारत ने रक्षा निर्यात के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाई है।
भारत अब केवल छोटे रक्षा उपकरणों और पुर्जों तक सीमित नहीं है, बल्कि ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल, आकाश वायु रक्षा प्रणाली, पिनाका रॉकेट सिस्टम, अस्त्र मिसाइल, गश्ती पोत और रडार जैसे आधुनिक रक्षा उपकरण भी दूसरे देशों को निर्यात कर रहा है। भारतीय रक्षा उत्पादों की पहुंच अब 80 से अधिक देशों तक हो चुकी है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप में गोला-बारूद की मांग बढ़ने से भारतीय रक्षा उद्योग को भी फायदा मिला है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पूर्वी और मध्य यूरोप के देशों को भारत का रक्षा निर्यात तेजी से बढ़ा है। भारत ने यूरोपीय देशों को आर्टिलरी और मोर्टार के गोले सहित गोला-बारूद की आपूर्ति की है। इससे अंतरराष्ट्रीय रक्षा बाजार में भारत की स्थिति मजबूत हुई है।
भारत ने रक्षा उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। सरकार ने वर्ष 2029-30 तक सालाना 50,000 करोड़ रुपये का रक्षा निर्यात करने का लक्ष्य रखा है।



