नई दिल्ली (महानाद) : भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव पास हो गया है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने प्रस्ताव स्वीकार करते हुए एक तीन सदस्यीय कमेटी के गठन का एलान कर दिया। जिसके बाद जज यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला द्वारा गठित तीन सदस्यीय कमेटी में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार, मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव और कर्नाटक हाईकोर्ट के सीनीयर एडवोकेट वीबी आचार्य शामिल हैं।
स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि मुझे यह प्रस्ताव नियमों के अनुरूप मिला है, जिसके बाद मैंने इस कमेटी का गठन किया है।
वहीं, इससे पूर्व सरकारी आवास में भारी मात्रा में नगदी मिलने के आरोपों का सामना कर रहे इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज यशवंत वर्मा को झटका देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आंतरिक जांच कमेटी की रिपोर्ट को चुनौती देने वाली उनकी याचिका खारिज कर दी। आंतरिक जांच कमेटी ने जस्टिस वर्मा को गंभीर कदाचार का दोषी पाते हुए अपनी रिपोर्ट में कहा था कि जस्टिस वर्मा पद पर बने रहने लायक नहीं हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस वर्मा की याचिका खारिज करते हुए कहा कि उनका आचरण विश्वास नहीं जगाता जिसके लिए उनकी याचिका पर विचार किया जाए। आंतरिक जांच कमेटी की प्रक्रिया में कोई कानूनी खामी नहीं है, प्रक्रिया पूरी तरह से कानूनी थी और सीजेआइ द्वारा उन्हें पद से हटाने की सिफारिश करने में भी कुछ गलत नहीं है। सीजेआइ न्यायपालिका के मुखिया हैं और न्याय व्यवस्था में शुचिता बनाए रखने के बारे में उनका देश के लोगों के प्रति भी कर्तव्य है।
आपको बता दें कि जस्टिस वर्मा जब दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश थे तब उनके सरकारी आवास में आग लग गई थी जिसे बुझाने पहुंचे अग्निशमन दल और पुलिस को उनके आवास में स्थित एक स्टोर से भारी मात्रा में जले हुए नोटों की गड्डियां मिलीं थी। जिसके बाद तत्कालीन सीजेआइ संजीव खन्ना ने मामले की जांच के लिए हाई कोर्ट के तीन न्यायाधीशों की एक आंतरिक जांच कमेटी बनाई थी। आंतरिक जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा को कदाचार का दोषी पाया था और कहा था कि वह पद पर बने रहने लायक नहीं हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने सीजेआइ की जस्टिस वर्मा को पद से हटाने के लिए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से की गई सिफारिश में किसी तरह की कानूनी खामी से इनकार किया है।



