नई दिल्ली (महानाद) : हाई कोर्ट ने फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के पीछे साजिश से जुड़े गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) मामले में पिछले 5 साल से जेल में बंद जेएनयू के पूर्व छात्र शरजील इमाम, उमर खालिद सहित कईं आरोपियों जमानत याचिका खारिज कर दी।
न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति शैलिंदर कौर की पीठ ने मामले में फैसला सुनाते हुए मौहम्मद सलीम खान, अब्दुल खालिद, अतहर खान, शिफा-उर-रहमान, मीरान हैदर, गुलफिशा फातिमा, शादाब अहमद की जमानत याचिका भी खारिज कर दी। बता दें कि विगत 9 जुलाई को अदालत ने अभियोजन व बचाव पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अभियोजन पक्ष ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध करते हुए कहा था कि यह स्वतःस्फूर्त दंगों का मामला नहीं है, बल्कि एक ऐसा मामला है जिसमें दंगों की साजिश पहले से ही एक भयावह मकसद के साथ बनाई गई थी।
शरजील इमाम व उमर खालिद ने लंबे समय से जेल में बंद होने का तर्क पेश करते हुए समानता के आधार पर जमानत की मांग की थी। वहीं, दिल्ली पुलिस के वकील सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया था कि यह विश्व में भारत को बदनाम करने की साजिश थी, केवल लंबी कैद जमानत देने का आधार नहीं है।
विदित हो सीएए-एनआरसी के विरोध-प्रदर्शन के दौरान हुई उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगे में 53 लोग मारे गए थे, जबकि 700 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। आरोपियों के खिलाफ यूएपीए व आईपीसी के प्रविधानों के तहत फरवरी 2020 के दंगों के कथित रूप से मास्टरमाइंड होने का मामला दर्ज किया गया था। शरजील इमाम को इस मामले में 25.8.2020 को गिरफ्तार किया गया था। जबकि, उमर खालिद को सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था।



