spot_img
spot_img
Tuesday, February 24, 2026
spot_img

बड़ी खबर : मुस्लिम विवाह और तलाक रजिस्ट्रेशन अधिनियम खत्म

महानाद डेस्क : असम ने भी समान नागरिक संहिता (UCC) की दिशा में कदम बढ़ा दिये हैं। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट ने शुक्रवार को असम में रहने वाले मुसलमानों द्वारा विवाह और तलाक के रजिस्ट्रेशन से जुड़े 89 साल पुराने कानून को रद्द कर दिया है। फैसले की जानकारी देते हुए पर्यटन मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने कहा कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पहले ही घोषणा की थी कि असम एक समान नागरिक संहिता लागू करेगा। आज हमने असम मुस्लिम विवाह और तलाक रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1935 को निरस्त करने का बहुत ही महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।

बता दें कि असम मुस्लिम विवाह और तलाक रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1935 में मुस्लिम विवाह और तलाक के लिए स्वेच्छा से रजिस्ट्रेशन का प्रावधान किया गया था। सरकार के नए फैसले का मतलब यह हुआ कि असम में अब इस कानून के तहत मुस्लिम विवाह और तलाक को रजिस्ट्रेशन करना संभव नहीं होगा। बरुआ ने कहा कि हमारे पास पहले से ही एक विशेष विवाह अधिनियम है और हम चाहते हैं कि सभी विवाह एक ही प्रावधान के तहत रजिस्टर्ड हों।

बरुआ ने बताया कि असम में वर्तमान में 94 अधिकृत व्यक्ति हैं जो मुस्लिम विवाह और तलाक का रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। लेकिन कैबिनेट के फैसले के साथ जिला अधिकारियों द्वारा इसके लिए निर्देश जारी करने के बाद उनका अधिकार समाप्त हो जाएगा। चूंकि ये लोग विवाह और तलाक का रजिस्ट्रेशन करके अपना जीवन यापन कर रहे थे, इसलिए सरकार ने उन्हें 2-2 लाख रुपये का एकमुश्त मुआवजा देने का फैसला किया है।

उन्होंने बताया कि समान नागरिक संहिता की दिशा में एक कदम आगे बढ़ने के अलावा सरकार ने इस बात को महसूस किया कि इस अधिनियम को निरस्त करना आवश्यक है। यह काफी पुराना और ब्रिटिश काल से चला आ रहा अधिनियम था। आज के सामाजिक मानदंडों से मेल नहीं खाता था। उन्होंने कहा कि हमने यह देखा कि मौजूदा कानून का इस्तेमाल कम उम्र के लड़कों और लड़कियों की शादियों को रजिस्टर्ड करने के लिए किया जा रहा था। हमें लगता है कि आज का कदम ऐसे बाल विवाह को रोकने में भूमिका निभाएगा।

बता दें कि विगत 12 फरवरी को मुख्यमंत्री सरमा ने कहा था कि उनकी सरकार राज्य में बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने और समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने के लिए एक मजबूत कानून लाने की योजना बना रही है। उन्होंने कहा था कि एक विशेषज्ञ समिति यह देखेगी कि बहुविवाह और यूसीसी दोनों को एक ही कानून में कैसे शामिल किया जाए।

Related Articles

- Advertisement -spot_img

Latest Articles