spot_img
spot_img
Sunday, March 8, 2026
spot_img

मुख्यमंत्री धामी पहुंचे बड़ा गुरुद्वारा, मत्था टेक कर की प्रदेश की खुशहाली की कामना

विकास अग्रवाल
काशीपुर (महानाद): उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज ननकाना साहिब बड़ा गुरुद्वारा पहुँचे और मत्था टेका व प्रदेश के सुख समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। इसके उपरांत उन्होंने गुरु तेग बहादुर जी के चरणों में शत-शत नमन करते हुए गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस पर आयोजित शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, अमृतसर द्वारा आसाम से अमृतसर तक नगर कीर्तन (पदयात्रा) में आये सभी संगत सदस्यों एवं उपस्थित महानुभावों का देवभूमि उत्तराखंड के समस्त नागरिकों की ओर से हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन किया।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि ये मेरा परम सौभाग्य है कि मुझे आज गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस के पावन अवसर पर आयोजित शहीदी नगर कीर्तन यात्रा की संगत का हिस्सा बनने का सुअवसर प्राप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि ये नगर कीर्तन यात्रा असम के श्री धोबड़ी साहिब से प्रारंभ होकर विभिन्न राज्यों से होते हुए श्री आनंदपुर साहिब पहुंचकर पूर्ण होगी जो कि लगभग 2500 किमी की है। उन्होंने कहा कि ये केवल एक नगर कीर्तन यात्रा नहीं, बल्कि आस्था, एकता और गुरु साहिब के संदेश जन-जन तक पहुंचाने का पवित्र अभियान है।

श्री धामी ने गुरु तेग बहादुर जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु तेग बहादुर जी ने उस संकटपूर्ण कालखंड में अपने प्राणों की आहुति दी, जब हमारे देश की संस्कृति, धर्म और आत्मसम्मान पर गंभीर खतरा मंडरा रहा था। उन्होंने कहा कि मात्र 14 वर्ष की अल्पायु में ही गुरु तेग बहादुर जी ने अपने पिता के साथ मुगलों के खिलाफ युद्ध में अद्वितीय वीरता का परिचय दिया, उनकी वीरता से प्रभावित होकर उनके पिता ने ही उनका नाम ‘तेग बहादुर’ अर्थात ‘तलवार का धनी’ रखा था। उन्होंने कहा कि तेग बहादुर जी ने कश्मीरी पंडितों पर हो रहे औरंगजेब के अत्याचार के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए कहा था कि ‘मैं हिंदुओं का पीर हूँ किसी हिन्दू से पहले मुझे मुस्लिम धर्म कबूल करा कर दिखाए…। औरंगज़ेब ने षड्यंत्रपूर्वक गुरु तेग बहादुर जी को दिल्ली बुलवाया और उन्हें बंदी बना लिया। फिर फरमान सुनाया या तो इस्लाम स्वीकार करो, या मृत्यु का वरण करो। जिस पर गुरु श्री तेग बहादुर जी ने कहा था-

तिलक जंजू राखा प्रभ ताका, कीनो बड़ो कलू महिं साका।
धरम हेत साका जिनि कीआ, सीसु दीआ परु सिररु न दीआ।।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी और उनके साथियों ने इस्लाम स्वीकार करने से इनकार कर दिया, तो उन पर घोर अत्याचार किए गए, उनके किसी शिष्य को खौलते हुए तेल में डाला गया, तो किसी को आरी से चीर दिया गया। इतने से भी जी नहीं भरा तो किसी को जीवित ही जला डाला गया। अंततः, गुरु तेग बहादुर जी जैसे महान संत, धर्मरक्षक और मानवता के प्रहरी का शीश काट दिया गया, परंतु गुरु साहब का साहस, बलिदान और संदेश अमर हो गया। उन्होंने कहा कि गुरु साहब के बलिदान ने ये बता दिया कि धर्म की रक्षा के लिए प्राण देना पुण्य है और अत्याचार के सामने सर झुकाना अधर्म है। यही कारण है कि उन्हें ‘हिन्द दी चादर’ के रूप में याद किया जाता है। उन्होंने कहा कि श्री गुरुनानक देव जी, श्री गुरु तेग बहादुर जी, श्री गुरु गोविन्द सिंह जी सहित हमारे सभी गुरुओं ने राष्ट्र को प्रथम मानते हुए भारत को एकसूत्र में पिरोने का कार्य किया। इसलिए इनके योगदान को जाने बिना देश के इतिहास को समझ पाना नामुमकिन है। उन्होंने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि मैं, ये कहूँ कि सिक्ख परंपरा वास्तव में ष्एक भारत श्रेष्ठ भारतष् की जीवंत परंपरा है तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।

धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहयोग से हम देवभूमि उत्तराखंड में गोविंद घाट से हेमकुंड साहिब तक 12.5 किलोमीटर लंबे रोपवे का निर्माण करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस रोपवे के निर्माण के बाद हेमकुंड साहिब आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में बढ़ोत्तरी होगी, क्योंकि रोपवे से महज 45 मिनट में पवित्र यात्रा पूरी हो सकेगी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार द्वारा 1947 के विभाजन का दर्द झेलने वाले शहीदों की स्मृति में विभाजन विभिषिका स्मृति स्थल का निर्माण भी कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारे गुरुओं को आदर्श मानकर हमारी सरकार भी देवभूमि उत्तराखंड के सांस्कृतिक मूल्यों और डेमोग्राफी को संरक्षित रखने हेतु संकल्पित होकर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि हमने जहां एक ओर प्रदेश में सख्त धर्मांतरण विरोधी और दंगा विरोधी कानूनों को लागू किया है, वहीं लैंड जिहाद, लव जिहाद और थूक जिहाद जैसी घृणित मानसिकताओं के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की है।

उन्होंने कहा कि आज के इस अवसर पर मैं, आप सभी को ये भी बताना चाहता हूँ कि हम 24 नवंबर को श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें बलिदान दिवस को भव्य रूप से मनाएंगे, इसके लिए मैंने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दे दिए हैं। जिससे हमारी आने वाली पीढ़ियाँ अपनी संस्कृति, धर्म और परंपराओं पर गर्व अनुभव करें और उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की ये पावन धरा, जहां वेदों की ऋचाएँ गूँजी हैं, जहां गुरु नानक देव जी और हिंद रक्षक गुरु गोबिंद सिंह साहब के पावन चरण पड़े हैं, उस पवित्र भूमि पर हमारी गौरवशाली सांस्कृतिक परम्पराओं को समृद्ध करना हम सभी का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप सभी श्री गुरु तेग बहादुर जी के समर्पण और बलिदान से प्रेरित होकर अपने जीवन में राष्ट्रप्रेम, सांस्कृतिक गौरव और नैतिक मूल्यों को सर्वाेपरि रखेंगे और उत्तराखंड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने के हमारे ष्विकल्प रहित संकल्पष् को पूर्ण करने में इसी प्रकार एकजुट होकर कार्य करते रहेंगे।

इस अवसर पर विधायक त्रिलोक सिंह चीमा, मेयर दीपक बाली, दर्जा राज्यमंत्री अनिल कपूर डब्बू, फरजाना बेगम, पूर्व विधायक हरभजन सिंह चीमा, राजेश शुक्ला, जिलाध्यक्ष मनोज पाल, डीएम नितिन सिंह भदौरिया, एसएसपी मणिकांत मिश्रा, एडीएम पंकज उपाध्याय, कौस्तुभ मिश्र, एएसपी निहारिका तोमर, एसपी अभय सिंह, एसडीएम अभय प्रताप सिंह, नगर आयुक्त रविंद्र बिष्ट सहित ननकना साहिब बड़ा गुरुद्वारा के प्रबंधक कमेटी व अनेक श्रद्धालुगण मौजूद थे।

Related Articles

- Advertisement -spot_img

Latest Articles