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Monday, April 6, 2026
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महाराष्ट्र : क्या इस्तीफा देकर उद्धव ने निभाया अपना वादा?

विकास अग्रवाल
महानाद डेस्क : आखिरकार साम-दाम-दंड-भेद अपनाने के बाद शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। और उनके साथी एकनाथ शिंदे ने भाजपा की मदद से सरकार बना ली और वे महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री बन गये।

बता दें कि लगभग 2 हफ्ते तक चले राजनीतिक घटनाक्रम में उद्धव सरकार के मंत्री रहे एकनाथ शिंदे 16 विधायकों के साथ बागी हो गये। और धीर-धीरे शिवसेना के 55 में से 39 विधायकों ने शिवसेना छोड़ दी। शिवसेना की ओर से उद्धव ठाकरे के दायें हाथ माने जाने वाले संजय राउत ने मोर्चा संभाला और पहले कहा कि विधायकों को अगवा किया गया है। फिर बोले कि बागी हुए ज्यादातर विधायक लौट आयेंगे। फिर वे धमकी देने लगे कि लौट कर तो मुंबई ही आना पड़ेगा। और फिर शिवसेना के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आये। वहीं उद्धव ठाकरे भावुक अपील करने लगे। मुख्यमंत्री का बंगला छोड मातोश्री में लौट आये। लेकिन एकनाथ शिंदे का कुनबा छोटा होने की बजाय बड़ा होता चला गया। और फिर सुप्रीम कोर्ट ने भी फ्लोर टेस्ट कराने के आदेश दे दिये।

जिसके बाद उद्धव ठाकरे के हाथ बिल्कुल खाली हो गये और उन्होंने सदन में हारने के बजाय अपना इस्तीफा देना अच्छा समझा। जिसके बाद भाजपा ने सबको चौंकाते हुए शिवसेना के बागी एकनाथ शिंदे को महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बना दिया। उससे भी चौंकाने वाला काम यह किया कि भाजपा के मुख्यमंत्री रहे देवेंद्र फड़नवीस का डिमोशन करते हुए उन्हें प्रदेश का उपमुख्यमंत्री बना डाला।

वहीं, मन में एक सवाल यह आता है कि उद्धव ठाकरे ने इस्तीफा क्यों दिया। बता दें कि एकनाथ शिंदे के बागी होने के बाद उद्धव ठाकरे बार-बार अपना इस्तीफा देना चाहते थे। यहां तक कि उन्होंने मुख्यमंत्री का बंगला भी खाली कर दिया था। कहीं ऐसा तो नहीं कि जब भाजपा-शिवसेना गठबंधन को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बहुमत मिला तो उद्धव ठाकरे इसलिए भाजपा से अलग हो गये कि उनके मुताबिक चुनाव से पहले भाजपा और शिवसेना में 2.5-2.5 साल मुख्यमंत्री बनाने का समझौता हुआ था। लेकिन चुनाव के बाद बड़ी पार्टी बनने पर भाजपा ने उक्त समझौते को दरकिनार कर दिया। जिसके बाद उद्धव ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाई और मुख्यमंत्री बन गये। लेकिन जैसे ही उनके 2.5 साल पूरे होने को आये उन्होंने ऐसा खेल खेला कि बाकी बचे 2.5 साल के लिए भाजपा के सरकार बनाने का रास्ता साफ कर दिया और अपनी ओर से 2.5-2.5 साल वाला फार्मूले पर कायम रहे।

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