विकास अग्रवाल
काशीपुर (महानाद) : विभिन्न मुद्दों को लेकर आयोजित की गई प्रेस वार्ता के दौरान मेयर दीपक बाली ने कहा कि वे चैती मेले का पौराणिक रूवरूप लौटायेंगे, जहां पहले की तरह श्रद्धालुओं की भीड़, दुकानों का जमघट लगेगा और मेले में पहले की तरह सस्ता सामान उपलब्ध होगा। वहीं सुविधायें सभी आधुनिक होंगी।
आपको बता दें कि आज मेयर दीपक बाली ने अपने कार्यालय में प्रेस वार्ता आयोजित कर बताया कि बताया कि चैती मेला परिसर के विकास को लेकर अब ठोस काम शुरू होने जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि विभिन्न वर्षों में चैती मेले के टेंडरों के द्वारा एकत्र हुए 13 करोड़ रुपये चैती मेला परिसर के सौंदर्यीकरण एवं सुख-सुविधाओं पर ही खर्च किये जायेंगे।
बाली ने बताया कि उक्त राशि का उपयोग चैती मेला परिसर के सौंदर्यीकरण, हरियाली, वॉकिंग एरिया, पेयजल, सुविधाओं, धर्मशाला और संरचनात्मक विकास पर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि एक सप्ताह के भीतर अधिकारियों और आर्किटेक्ट्स के साथ बैठक कर इसकी योजना पर काम शुरू किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह योजना मानसखंड योजना से अलग होगी। बता दें कि मां बाल सुंदरी मंदिर एवं मोटेश्वर महादेव मंदिर को पहले ही मानसखंड में शामिल किया जा चुका है।
वहीं, ‘महानाद’ संपादक विकास अग्रवाल द्वारा यह पूछने पर कि जबसे मेले का सरकारीकरण हुआ है, तबसे सरकार का राजस्व तो बढ़ा है लेकिन मेले की बढ़ती महंगाई के कारण दुकानदारों ने मेले में आना छोड़ दिया है और जो सामान महंगा हो गया है। उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी केवल अपना राजस्व बढ़ाना नहीं है, सरकार का कार्य अपनी पौराणिक संस्कृति को संजो कर भी रखना है?
इस पर मेयर दीपक बाली ने माना कि राजस्व बढ़ाना ही मेले का उद्देश्य नहीं हो सकता। उन्होंने स्वीकार किया कि मेले की जीवंतता, सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक स्वरूप को बचाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि अगले मेले से पहले एक समग्र योजना बनाकर मेले को फिर से उसके पुराने आकर्षण के साथ जीवंत किया जाए। इस संबंध में उन्होंने संकेत दिया कि यदि जनमत और नियमों के अनुसार उचित हुआ, तो नगर निगम भविष्य में चैती मेले के संचालन की जिम्मेदारी लेने पर भी विचार कर सकता है।



