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Saturday, January 10, 2026
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कौन सा पंजा था जो 1 रुपये में से घिस लेता था 85 पैसे : मोदी

जर्मनी (महानाद) : तीन दिनों के यूरोप दौरे पर जर्मनी पहुंचे पीएम मोदी ने भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कांग्रेस पर तंज कसा। मोदी ने कहा कि कौन सा पंजा था जो 1 रुपये में से 85 पैसे घिस लेता था।

सोमवार को जर्मनी के बर्लिन में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ये मेरा सौभाग्य है कि मुझे मां भारती की संतानों को आज जर्मनी में आकर मिलने का अवसर मिला है। आप सबसे मिलकर बहुत अच्छा लग रहा है। आपका प्यार और आशीर्वाद मेरी सबसे बड़ी ताकत है। जब किसी देश का मन बन जाता है तो वह मनचाहे रास्तों पर चलता है और मनचाही मंजिलों को पाकर ही रहता है। आज का युवा भारत का तेज विकास चाहता है। युवा समझते हैं कि तेज विकास के लिए राजनीतिक स्थिरता जरूरी है। भारत अब समय नहीं गंवाएगा। आज वक्त क्या है और इस वक्त का सामर्थ्य क्या है ये बात हिंदुस्तान भली भांति जानता है।

मोदी ने कहा कि मैं देश का पहला ऐसा प्रधानमंत्री हूं जो आजाद हिंदुस्तान में पैदा हुआ हूं। भारत जब अपनी आजादी के 100 साल मनाएगा उस समय देश जिस ऊंचाई पर होगा उस लक्ष्य को लेकर आज हिंदुस्तान मजबूती के साथ एक के बाद एक कदम लेकर तेज गति से आगे बढ़ रहा है। भारत में न कभी साधनों की कमी रही और न कभी संसाधनों की कमी रही। आजादी के बाद देश ने एक मार्ग तय किया, एक दिशा तय की लेकिन समय के साथ जो बहुत सारे परिवर्तन होने चाहिए थे, जिस तेजी से होने चाहिए थे, जितने व्यापक होने चाहिए थे, हम कहीं ना कहीं पीछे छूट गए। भारत के जन-जन में आत्म विश्वास भरने के लिए सरकार के प्रति भरोसा जरूरी था।

मोदी ने कहा कि जहां जरूरत न हो वहां सरकार का प्रभाव भी नहीं होना चाहिए। देश तब आगे बढ़ता है जब जनता देश के विकास का नेतृत्व करें। देश तब आगे बढ़ता है जब लोग आगे आकर उसकी दिशा तय करें। आज के भारत में सरकार नहीं, मोदी नहीं बल्कि देश की जनता ड्राइविंग फोर्स पर बैठे हैं। इसलिए हम देश के लोगों के जीवन से सरकार का दवाब भी हटा रहे हैं और सरकार का बेवजह दखल भी हटा रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ये वही देश है जिसे आप छोड़कर यहां आए थे। ब्योरोक्रेसी भी वही है, दफ्तर भी वही है, टेबल-फाइल सब वही है। लेकिन अब नतीजे बहुत बेहतर मिल रहे हैं। 2014 से पहले जब मैं आपसे बात करता था तो उन्हें बड़ी शिकायत होती थी कि जहां देखो लिखा रहता था वर्क इन प्रोग्रेस.. मैं किसी की आलोचना नहीं कर रहा। पहले सड़क बनती है, फिर बिजली वाले खोद देते हैं, फिर पानी वाले खोद देते हैं, फिर टेलीफोन वाले खोद देते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि सरकारी दफ्तरों में आपसी संवाद नहीं होता। सबका अपना रिपोर्ट कार्ड है लेकिन परिणाम वर्क इन प्रोग्रेस। अब सब विभाग अपने हिस्से का काम एडवांस में प्लान कर रहे हैं। आज भारत की सबसे बड़ी ताकत स्कोप, स्पीड और स्केल है। आज भारत में सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश आ रहा है। आज छोटे छोटे शहरों को नए रूट से जोड़ा जा रहा है।

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