विकास अग्रवाल
काशीपुर (महानाद) : 21 जून से विश्व योग दिवस के उपलक्ष्य में निःशुल्क 3 दिवसीय प्रातः 6 से 7 बजे तक शिविर पूर्णधेनु योग शोध संस्थान में योग का आज समापन हो गया।
शिविर में वैद्य आचार्य रितिन योगी ने बताया योगा को प्रायः हम सभी शारीरिक व्यायाम समझ लेते है। योग देशी कसरत, एरोबिक्स, जिम या वर्कआउट या व्यायाम नही है, बल्कि ये ऐसी विधि है जो शरीर को ऐसी अवस्था मे ले जाती है जहाँ सजगता, शिथिलता, एकाग्रता, जागरूकता और ध्यान के द्वार खुलता है। योग शरीर की नाड़ियां (नर्व), चक्र (एंडोक्राइन ग्रंथियां) और आंतरिक अवयवों (ऑर्गन्स) को फैलाकर उनकी मालिश कर उन्हें जीवंत बनाता है और यही से शरीर स्वस्थ होता है। हम किसी भी असाध्य बीमारी को योग से ठीक कर सकते है।
पुर्नधेनु योग के मार्गदर्शक व्यक्ति विश्वनाथ प्रसाद, बेतिया (बिहार) ने कहा, वज्रासन को खाने के तुरंत बाद मूत्र करने के पश्चात 5 से 10 मिनट करने से जठराग्नि प्रदीप्त होती है, उदर वायु विकार दूर होते हैं। बाल सफेद नहीं होते। गॉल ब्लैडर या किडनी में पथरी नहीं बनती। नाभि केंद्र में रक्त का संचार होने से नाभि हटती नही। सभी रोग पेट से उत्पन्न होते है। भोजन का पूर्ण पाचन होने से वज्र नाड़ी में अवरोध उत्पन्न नहीं होता। वज्रासन पेट को वज्र के सामान मजबूत करता है। मुसलमानों में वज्रासन प्रार्थना और ध्यान का एक आसान है।
उन्होंने बताया कि हमें उपवास महीने में एक दिन या दो दिन या साल में एक सप्ताह या 30 दिन का उपवास रखना चाहिये, क्योंकि अब हम घर जैसा खाना नहीं खा रहे है, भोजन में केमिकल, पेस्टीसाइड और प्लास्टिक के कण रहते हैं, उपवास करते रहने से शरीर इन जहर को शरीर से बाहर निकालने पर काम करने लगता है।



