हर्ष वर्धन यादव
शाहजहांपुर (महानाद) : जनपद के राजकीय मेडिकल कॉलेज स्थित डीडीआर टीबी सेंटर में मल्टीड्रग-रेसिस्टेंट ट्यूबरक्लोसिस (एमडीआर-टीबी) के रोगियों के लिए एक नई और प्रभावी उपचार प्रणाली की शुरुआत की गई है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार ने बीपीएएलएम (BPALM) रेजिमेन का शुभारंभ एमडीआर-टीबी के एक रोगी को नई दवा देकर किया। इस मौके पर विभाग के अन्य डॉक्टर और स्टाफ सदस्य भी मौजूद रहे।
टीबी एवं चेस्ट रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ. अंकिता वर्मा ने जानकारी दी कि एमडीआर-टीबी, जिसे बिगड़ी टीबी भी कहा जाता है, के इलाज में पहले रोगियों को 9 से 20 माह तक दवाएं लेनी पड़ती थीं। लम्बे समय तक दवा चलने से मरीज मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान हो जाते थे, जिससे इलाज अधूरा छूटने का खतरा भी बना रहता था। अब बीपीएएलएम रेजिमेन के तहत मरीजों को सिर्फ छह माह तक ही दवा लेनी होगी, जिससे वे पूरी तरह स्वस्थ हो सकेंगे।
उन्होंने बताया कि यह रेजिमेन विश्व स्वास्थ्य संगठन (WTO) द्वारा भी स्वीकृत है और इसके परिणाम भी काफी सकारात्मक रहे हैं। खास बात यह है कि एमडीआर-टीबी के सभी मरीजों को ये दवाएं पूरी तरह से निःशुल्क प्रदान की जाएंगी, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को भी लाभ मिलेगा।
इस अवसर पर डॉ. शुभम जैन, आशीष श्रीवास्तव, रंजीत सक्सेना, मनोज कुमार, अवन यादव और विनोद कुमार भी मौजूद रहे।
यह पहल शाहजहांपुर के टीबी मरीजों के लिए एक नई उम्मीद बनकर सामने आई है, जिससे जिले में टीबी नियंत्रण के प्रयासों को नई गति मिलेगी।



