विकास अग्रवाल
काशीपुर (महानाद) : प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश काशीपुर ने नेपाली युवकों को बंधक बनाकर रखने के आरोपी की जमानत खारिज कर दी।
आपको बता दें कि नेपाली युवकों को बंधक बनाकर रखने एवं उनके साथ मारपीट कर जान से मारने कीधमकी दने एवं षड़यत्र रचकर उनके पैसे हड़पने के आरोपी धनगढ़ी, नेपाल निवासी बिरेन्द्र छत्रशाही ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश काशीपुर की अदालत में जमानत प्रार्थना पत्र देकर कहा कि उसने किसी व्यक्ति को बंधक नहीं बनाया है, न ही किसी से जबरन मजदूरी करवाई है। आईटीआई थाना पुलिस ने उसे झूठा फंसाया है। उसे पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया और गिरफ्तार कर लिया गया। उसने प्रार्थना की कि उसे जमानत पर रिहा किया जाये।
वहीं, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता रतन सिंह काम्बोज ने जमानत प्रार्थना-पत्र के विरोध मयह तर्क प्रस्तुत किया कि अभियुक्त तथा अन्य सहअभियुक्तों द्वारा एक संगठित गिरोह बनाकर नेपाल के नवयुवकों को जिसमें कुछ नाबालिग हैं, को नौकरी का झांसा देकर उनको धोखाधड़ी से भारत बुलाकर उनसे नौकरी लगाने के लिए षडयंत्र कर पैसा लेने तथा उनको बंधक बनाकर उनके साथ मारपीट गाली गलौज की गयी तथा उन्हें जान से मारने की धमकी दी गयी। मामला गम्भीर प्रकृति का है। अतः जमानत प्रार्थना-पत्र निरस्त किया जाये।
दोनों पक्षों को सुनने के पश्चात प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश मनोज गर्ब्याल ने आरोपी की जमानत निरस्त करते हुए कहा कि अभियोजन प्रपत्रों के परिशीलन से यह विदित हो रहा है कि अभियुक्त के ऊपर सह अभियुक्तगण के साथ मिलकर नेपाली मूल के 32 लड़कों जिसमें से 03 नाबालिग थे, को सोशल मीडिया फेसबुक व मैसेंजर के माध्यम से सम्पर्क कर बहला-फुसलाकर नौकरी का झांसा देकर भारत में लाने तथा काशीपुर क्षेत्र में रखने का अभियोग है। मामले में नेपाली एम्बेसी से शिकायत मिलने पर नेपाली एम्बेसी के प्रतिनिधि नवीन जोशी के साथ काशीपुर में महाराज सिंह के घर दबिश देकर उक्त मकान से नेपाली मूल के कुल 32 लड़के जिसमें 03 नाबालिग थे, को मुक्त कराया गया।
उपरोक्त तथ्यों एवं परिस्थितियों तथा अभियुक्त के ऊपर लगाए गए अभियोग की प्रकृति एवं गम्भीरता के दृष्टिगत इस न्यायालय के विचार में अभियुक्त जमानत प्राप्त करने का अधिकारी नहीं है। अभियुक्त बिरेन्द्र छत्रशाही का जमानत प्रार्थनापत्र निरस्त किया जाता है।



