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Friday, April 3, 2026
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बड़ी खबर : अब हिन्दू-मुस्लिम के बीच जमीन खरीदना/बेचना हुआ मुश्किल

महानाद डेस्क : असम सरकार ने अंतर-धार्मिक (हिन्दू-मुस्लिम) जमीन हस्तांतरण के लिए एक एसओपी जारी की है। इसका उद्देश्य ऐसी जमीनों की खरीद-बिक्री की गहराई से जांच करना है जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक ताने-बाने और पारदर्शिता को सुनिश्चित किया जा सके। मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने बुधवार को कैबिनेट बैठक के बाद इसकी जानकारी दी।

मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि असम एक संवेदनशील राज्य है। यहां जमीन के सौदों को बहुत सावधानी से देखना जरूरी है ताकि सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रीय सुरक्षा बनी रहे। हमारा मकसद यह सुनिश्चित करना है कि हर सौदा पारदर्शी हो और उसका कोई गलत असर न पड़े।

नइ्र प्रक्रिया के तहत यदि कोई व्यक्ति अपनी जमीन किसी अलग धर्म के व्यक्ति को बेचना चाहता है, तो उसकी गहनता से जांच की जायेगी। इसका मतलब यह हुआ कि यदि हिन्दू-मुस्लिम आपस में किसी जमीन को खरीदना/बेचना चाहते हैं तो सरकार द्वारा जारी एसओपी का पालन करते हुए उक्त सौदे को जांचा-परखा जाएगा। जांच में निम्न पहलुओं को देखा जाएगा –
– क्या इस सौदे में कोई फ्रॉड या गैरकानूनी गतिविधि तो नहीं?
– जमीन खरीदने वाला पैसा कहां से ला रहा है?
– क्या इस हस्तांतरण से इलाके की सामाजिक शांति पर असर पड़ेगा?
– क्या इस सौदे से देश की सुरक्षा को कोई खतरा हो सकता है?

बता दें कि यह एसओपी लागू होगी जब खरीदार और बेचने वाले अलग-अलग धर्मों के हों। यदि दोनों एक ही धर्म के हों, तो यह एसओपी लागू नहीं होगी।

असम सरकार की इस नई प्रक्रिया के तहत जमीन हस्तांतरण की हर एप्लीकेशन को कई चरणों से गुजरना होगा –
– जमीन हस्तांतरण की एप्लीकेशन सबसे पहले जिला आयुक्त को दी जाएगी।
– जिला आयुक्त इस एप्लीकेशन को राज्य के राजस्व विभाग को भेजेगा।
– राजस्व विभाग का एक नोडल अधिकारी इस अर्जी को असम पुलिस की स्पेशल ब्रांच को सौंपेगा। यह शाखा सौदे की पूरी पड़ताल करेगी। वे देखेंगे कि कहीं कोई धोखाधड़ी, जबरदस्ती या गैरकानूनी काम तो नहीं हो रहा। साथ ही, खरीदार के पैसे के स्रोत और इलाके के सामाजिक माहौल पर असर की भी जांच होगी।
– जांच के बाद विशेष शाखा अपनी रिपोर्ट राजस्व विभाग को भेजेगी। इसके आधार पर जिला आयुक्त अंतिम फैसला लेगा कि सौदा मंजूर करना है या नहीं।

बता दें कि इस एसओपी के दायरे में एनजीओ भी आयेंगे। यदि कोई बाहरी एनजीओ असम में जमीन खरीदकर स्कूल, अस्पताल या दूसरी सुविधाएं बनाना चाहता है, तो उसे भी इस प्रक्रिया से गुजरना होगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि कुछ एनजीओ ने बारपेटा, कछार और श्रीभूमि जिलों में जमीन खरीदने की कोशिश की है। इनमें से कई एनजीओ केरल से हैं। ऐसे में यह प्रक्रिया सुनिश्चित करेगी कि उनकी मंशा और फंडिंग की जांच हो।

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