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Wednesday, February 4, 2026
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डीएम के कड़े आदेश : अपने-अपने क्षेत्र में ग्रीष्मकालीन धान की नर्सरी नष्ट करवायें एसडीएम

रुद्रपुर (महानाद) : उधम सिंह नगर के डीएम नितिन सिंह भदौरिया ने जिले के सभी उप जिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में ग्रीष्मकालीन धान की नर्सरी नष्ट करवाने के आदेश दिये हैं।

उक्त आदेश जारी करते हुए डीएम नितिन भदौरिया ने कहा कि अधोहस्ताक्षरी कार्यालय के आदेश संख्या 720 दिनांक 23.07.2025 के द्वारा जनपद ऊधम सिंह नगर में ग्रीष्मकालीन धान की नर्सरी तैयार करना एवं रोपाई करना वर्ष 2025 के उपरांत अनवरत रूप से प्रतिबंधित किया गया है। उक्त आदेश के परिपालन के लिए ग्रीष्मकालीन धान की अनाधिकृत रूप से तैयार नर्सरी को नष्ट करने के लिए आपकी अध्यक्षता में अधोहस्ताक्षरी के कार्यालय आदेश संख्या 2094 दिनांक 29.01.2026 के द्वारा समिति गठित की गई है।

उक्त आदेशों के क्रम में आप ग्रीष्मकालीन धान की अनाधिकृत तैयार की जा रही नर्सरियों को प्राथमिकता के आधार पर नष्ट कराना सुनिश्चित करें। उपरोक्त के अतिरिक्त ऐसे स्थल / खेत जहाँ पर जल भराव के कारण मक्का उगाया जाना संभव नही है, उन क्षेत्रों के लिए निम्न प्रक्रिया अपना कर ग्रीष्मकालीन धान की नर्सरी तैयार करने एवं रोपाई करने की अनुमति आप अपने स्तर से दे सकते हैं-

1. जलभराव वाले क्षेत्र के कृषक कृषि विभाग के विकास खण्ड / न्यायपंचायत स्तरीय कार्यालय तथा राजस्व विभाग के राजस्व उपनिरीक्षक, तहसील में आवेदन पत्र जमा कर सकते हैं।

2. पत्र हस्तलिखित अथवा टाईप किया हुआ, किसी भी तरह का हो सकता है, लेकिन उसके साथ भूमि का विवरण संलग्न करना होगा।

3. उक्त प्राप्त सभी आवेदन पत्रों का कृषि विभाग (विकास खण्ड प्रभारी / न्यायपंचायत प्रभारी) एवं राजस्व विभाग (राजस्व उपनिरीक्षक) के कर्मचारियों द्वारा स्थलीय निरीक्षण कर आख्या एक सप्ताह के अन्दर प्रस्तुत की जाएगी और प्रकरण उपयुक्त पाये जाने पर अनुमति सम्बन्धित उपजिलाधिकारी कार्यलय से निर्गत की जाएगी और स्थलीय जाँच में अनुपयुक्त पाये गए आवेदन पत्रों को निरस्त कर सम्बन्धित कृषक को लिखित में अवगत कराया जाएगा।

4. उपरोक्त प्रक्रिया में इस बात का ध्यान रखा जाए कि पात्र कृषकों (ऐसे स्थल / खेत जहाँ पर जल भराव के कारण मक्का उगाया जाना संभव नही है तथा सिर्फ धान की खेती ही की जा सकती है।) को कोई असुविधा न हो और अपात्र कृषकों (ऐसे स्थल / खेत जहाँ पर ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर मक्का उगाया जाना संभव है।) को इस का लाभ न मिल सकें।

5. सामूहिक रूप से पूरे गाँव या पूरे क्षेत्र को अनुमति जारी नहीं की जाएगी। अतः उक्त निर्देशों का कड़ाई से पालन करते हुए कार्यवाही करना सुनिश्चित करें।

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