कब्जा करने वाले यह तय नहीं कर सकते कि रेलवे को अपनी किस जमीन का उपयोग करना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट
हल्द्वानी (महानाद) : बनभूलपुरा में रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण को लेकर सुप्रीम फैसला आ गया। सुप्रीम कोर्ट ने बनभूलपुरा में रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण हटाने का आदेश जारी कर दिया।
आज, मंगलवार को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान फैसला सुनाते हुए कहा कि रेलवे की जमीन से अतिक्रमण हटाना होगा, क्योंकि यह सरकारी संपत्ति है और रेलवे को इसका उपयोग करने का पूरा अधिकार है। इससे प्रभावित परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवेदन कर सकेंगे।
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि संबंधित भूमि राज्य की है और वहां रह रहे लोग उस जमीन पर बने रहने के अधिकार का दावा नहीं कर सकते। यह मामला अधिकार का नहीं बल्कि पुनर्वास और सहायता का है। मानवीय पहलू को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई तक किसी भी परिवार को बेदखल नहीं किया जाएगा।
न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा कि उक्त भूमि राज्य की है और उसका उपयोग कैसे किया जाए, यह राज्य का विशेषाधिकार है। उनकी प्रथम दृष्टया राय है कि यह मामला अधिकार से अधिक सहायता का है।
वहीं चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि किसी महत्वाकांक्षी रेलवे परियोजना के लिए आवश्यक भूमि का निर्धारण वहां रह रहे निवासी नहीं कर सकते। यदि बेहतर सुविधाओं वाली वैकल्पिक जगह उपलब्ध हो सकती है, तो उसी स्थान पर बने रहने की जिद ठीक नहीं है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने वहां रह रहे पात्र व्यक्तियों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पुनर्वास की संभावनाओं पर जोर दिया। चीफ जस्टिस ने पूछा कि क्या भूमि अधिग्रहित कर मुआवजे के बजाय पात्र परिवारों को मकान देकर पुनर्वास किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि अधिकांश प्रभावित परिवार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्लूएस) में आ सकते हैं। पात्रता आवेदन के आधार पर तय होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन को निर्देश देते हुए कहा कि नैनीताल कलेक्टर और हल्द्वानी प्रशासन वहां रह रहे लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना के आवेदन पत्र उपलब्ध कराएं। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण उक्त स्थल पर पुनर्वास शिविर लगाए। सभी परिवारों के आवेदन करने तक शिविर जारी रहें। शिविर ईद के बाद 19 मार्च के बाद आयोजित हों और 31 मार्च से पहले इसका व्यावहारिक समाधान निकाला जाए।
कोर्ट ने कहा कि इसमें काउंसलर और सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी जोड़ा जाए। पात्र विस्थापित परिवारों को 6 महीने तक प्रति माह 2,000 रुपये की अंतरिम सहायता दी जाएगी। रेलवे को अदालत के पूर्व आदेश के अनुसार अनुग्रह राशि (एक्स-ग्रेशिया) भुगतान करने के निर्देश भी दिए गए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गतिरोध अनिश्चितकाल तक जारी नहीं रह सकता। पुनर्वास की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिससे प्रभावित लोगों की आजीविका प्रभावित न हो।
वहीं, कोर्ट ने कहा कि अप्रैल में मामले की अगली सुनवाई तक अतिक्रमण हटाने की कोई भी दंडात्मक कार्रवाई अमल में नहीं लाई जाएगी। इस मामले में दी गई सुरक्षा उत्तराखंड के अन्य अवैध कब्जे वाले मामलों पर लागू नहीं होगी।
आपको बता दें कि यह मामला करीब 5 हजार परिवारों के 50 हजार लोगों की जिंदगी से जुड़ा है। सुनवाई से पहले एसएसपी के निर्देश पर बनभूलपुरा और हल्द्वानी रेलवे स्टेशन क्षेत्र में भारी पुलिस और पीएसी की तैनाती की गई। संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च कर लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की गई।
SSP NAINITAL डॉ0 मंजुनाथ टी0सी0 द्वारा सभी अधीनस्थ प्रभारियों को शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने हेतु आवश्यक प्रबन्ध करने के निर्देश दिए गए है।
👉🏻AREA DOMINATION की कार्यवाही लगातार जारी है।
👉🏻पुलिस का कड़ा पहरा, चप्पे चप्पे पर चैकिंग की जा रही है।
👉🏻 संदिग्धों के विरुद्ध प्रीवेंटिव डिटेंशन की कार्यवाही जारी रहेगी।
👉🏻 निरंतर सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है।
👉🏻 लगातार सीसीटीवी और स्पेशलाइज्ड ड्रोन से मॉनिटरिंग की जा रही है।



