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Thursday, February 19, 2026
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मानसून की दस्तक से काशीपुर प्रशासन अलर्ट, पिछली बार ढेला में बह गये थे 8 मकान

अजीम खान
काशीपुर (महानाद) : जैसे ही मैदानी इलाकों में मानसून ने अपनी दस्तक दी वैसे ही स्थानीय प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है और बाढ़ चौकियां बनाकर क्षेत्र में मुस्तैदी से नजर रखी जा रही है।

आपको बता दें कि पहाड़ी क्षेत्रों में अंधाधुंध बारिश से मैदानी क्षेत्रों की नदियां/नहरें उफान पर आ जाती हैं और कईं मकानों को अपने आगोश में ले लेती हैं। इसी खतरे को गंभीरता से लेते हुए काशीपुर प्रशासन ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं और बाढ़ चौकियों व राहत केंद्र बनाकर कर्मचारियों को तैनात कर दिया गया है।

विदित हो कि पिछली बार बरसात में अपना भयावह रूप धारण करते हुए ढेला नदी ने अपने किनारे बसे लगभग 8 मकानों को ध्वस्त कर दिया था। लोगों ने कई बार सिंचाई विभाग को सचेत किया कि भू-कटाव के चलते लोगों के मकान ढेला नदी के आगोश में समा जाते हैं, जिससे लोगों को काफी नुकसान का सामना करना पड़ता है । इसी को लेकर लोगों ने ढेला नदी में पिचिंग कार्य करने के लिए सिंचाई विभाग से अनुरोध किया था। सिंचाई विभाग ने पिचिंग कार्य तो शुरू तो कर दिया लेकिन वह पूरा नहीं हो पाया। यदि समय रहते यह पिचिंग कार्य पूरा हो जाता तो ढेला नदी के किनारे मकानों पर मंडराने वाला खतरा खतम हो जाता।

यहा बता दें कि प्रशासन द्वारा नदी किनारे रह रहे लोगों को जागरूकता का पाठ पढ़ा कर नदी से दूर रहने की सलाह तो दी जाती है लेकिन जो भू माफिया इन गरीब लोगों को अपना निशाना बनाते हैं और उन्हें ऐसी खतरनाक जगहों पर जमीन बेच देते हैं, उनपर भी नकेल कसने की जरूरत है।

अलर्ट को देखते हुए प्रशासन ने ढेला नदी के किनारे रह रहे लोगों को वहां से हटाने की तैयारियां प्रशासन शुरु कर दी हैं। क्योंकि काशीपुर में बहने वाली ढेला और बहल्ला नदी पहाड़ी क्षेत्रों से होकर आती हैं, साथ ही यह नदियां पड़ोसी क्षेत्र में स्थित डामों से भी जुड़ी हैं और डैम का जलस्तर जैसे ही बढ़ता है वैसे ही वहां से पानी छोड़ दिया जाता है।

एसडीएम काशीपुर अभय प्रताप के नेटवर्क में लगातार टीमें मॉनिटरिंग कर रही हैं और डामों के प्रशासन से संपर्क साधे बैठी हैं। एसडीएम अभय प्रताप सिंह ने बताया कि कि प्रशासन ने बाढ़ जैसी स्थिति से निपटने के लिए सारी तैयारियां पूर्ण कर ली हैं। ढेला नदी के किनारे जो लोग बसे हैं उनको भी सतर्क कर दिया गया है। जगह-जगह बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं तथा अधीनस्थ अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वह चौकियों पर पूर्ण तरीके से निगरानी रखें।

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