बांग्लादेशी व रोहंगिया बन सकते हैं समस्या

बांग्लादेशी व रोहंगिया बन सकते हैं समस्या

  • किरायेदारों का वेरीफिकेशन कराया जाना आवश्यक।
  • भाजपा नेता बने है लापरवाह, पैसा कमाने की होड़।

गोविंद शर्मा
देवबंद (महानाद) : नगर व क्षेत्र में बड़ी संख्या मे बांग्लादेशी व रोहंगिया मुस्लिम अवैध रूप से छिपे हुए हैं। शासन और प्रशासन इस ओर से आंखें बंद किए हुए हैं। यदि इनको खोज कर नहीं निकाला गया तो भविष्य में यह बड़ी चुनौती बन सकते हैं।

वर्तमान समय में देश के सामने बांग्लादेशी और रोहंगिया एक बड़ी चुनौती हैं। लाखों बांग्लादेशी व रोहंगिया मुस्लिम भारत में अवैध तरीके से घुस गये हैं, जो देश की अर्थव्यवस्था पर बड़ा बोझ बन गये हैं। यह लोग भारत में यहां पहले से मौजूद हिन्दू संस्कृति के दुश्मनों और गद्दी के लिए कुछ भी कर गुजरने वाले वोट के भूखे राजनैतिक दलों के नेताओ से संरक्षण पाये हैं। क्योकि इन नेताओं को तो केवल वोट ही चाहिए।

देवबंद नगर जहां धर्म के आधार पर वर्षों से वोट प्रतिशत 60 मुस्लिम और 40 हिन्दू चला आरहा था, वहीं पिछले कुछ वर्षों में ग्रामीण क्षेत्र से आकर नगर में बसे हिन्दुओं के कारण लगभग बराबर होने के करीब पहुंचने लगा था। इसी को ध्यान में रखकर कुछ मुस्लिम धार्मिक व राजनीतिक दलों के लोगों ने बड़ी संख्या में बांग्लादेशियों तथा रोहंगियाओं को यहां बुलाकर घनी मुस्लिम आबादियों में छिपा कर रखा हुआ है। इन लोगों को स्थानीय धार्मिक व राजनीतिकों का पूर्ण संरक्षण प्राप्त है। इतना ही नहीं बड़ी संख्या में इन अवैध रूप से देश में घुसे लोगों के आधार कार्ड, राशन कार्ड, वोटरकार्ड, बैंक खाते खोले गये हैं ताकि नगर देवबंद में मुस्लिम वोट अधिक रहें और नगर पालिका चुनाव में चेयरमैन मुस्लिम बने और सभासद अधिक मुस्लिम ही बने ताकि सरकारी सम्पत्ति को आसानी से खुर्दबुर्द किया जा सके और वही हो रहा है।

भाजपा की केन्द्र और प्रदेश में आई सरकार के बाद नगर के हिन्दू समाज में विश्वास जगा था कि अब व्यवस्था में सुधार होगा परन्तु ऐसा हुआ नहीं। भाजपा के पूर्व नगर अध्यक्ष गजराज राणा जिन्होंने अपनी टीम के साथ विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी कुं. ब्रजेश सिंह को जितवाने के लिए रात दिन एक किया और जिताया भी, मगर गजराज राणा के द्वारा तैयार किसी भी योजना का राज्य स्तर पर विधायक सहित स्थानीय कुछ बड़े कहे जाने वाले नेताओं ने समर्थन नहीं किया। भाजपा की राजनीति से जुड़े लोगों का कहना है कि विधायक गजराज राणा की नगर और क्षेत्र में बढती प्रतिष्ठा से चिंतित होने लगे थे। गजराज राणा ने देवबंद नगर की सीमा बढ़ाने तथा नगर के बाहर बनी दर्जनों कालोनियों को नगर पालिका सीमा मे लाने तथा वार्डाे का पुनः निर्धारण करके ठीक किए जाने का प्रस्ताव बना कर नगर विकास मंत्री के पास भेजा था, लेकिन वह मंजूर नहीं हुआ है। यदि विधायक चाहते तो यह सम्भव था। ऐसा होने पर सभासदों की संख्या बढ़ती और भविष्य मे हिन्दू चेयरमैन बनने का रास्ता साफ हो जाता। दूसरे पिछले पचास साल से राजकीय महाविद्यालय मे विज्ञान वर्ग के अलावा कई विषय नहीं है, जिनकी पढाई के लिए बच्चों को मुजफ्फरनगर व सहारनपुर जाना पड़ता है, उसके लिए प्रयास किए जा रहे थे, जो सफल नहीं हुए हैं।

पूर्व भाजपा नगर अध्यक्ष गजराज सिंह राणा ही नगर में एक मजबूत हिन्दूवादी नेता के रूप मे उभरे थे, मगर उनको भाजपा के ही नेताओं ने किनारे लगा दिया। भाजपा के वर्तमान कर्ताधर्ताओं का ध्यान हिन्दुत्व व अपने वोटरों की ओर कम अपने धंधों को चमका कर धन कमाने की ओर अधिक रहा है। नगर पालिका में एक वर्ग विशेष का वर्चस्व होने के कारण तमाम नजरुल की भूमि व भवनों को एक समुदाय के लोगों को ही जायज व नाजायज रूप से दे दिया गया है।

इतना ही नहीं, सोची समझी रणनीति के अन्तर्गत बाहर से लाकर बांग्लादेशियों व म्यमांरवासी रोहंगियाओं को बसाया जा रहा है। भाजपा के नेताओं को इसमे कोई दिलचस्पी न होने के कारण प्रशासन भी कुछ नहीं कर रहा है। नगर में बड़ी संख्या मे किरायेदारों का वेरीफिकेशन न होने के कारण एक समुदाय की जनसंख्या बढती जा रही है । नगर और क्षेत्र में बांग्लादेशी व रोहंगियाओं को खोजने के लिए मस्जिद व मदरसों में रहने वाले छात्रों तथा अन्यों की जांच पिछले 20 वर्ष को आधार बनाकर की जाये, यदि भाजपा नेता इन साढ़े चार सालों में इस ओर प्रयास करते तो जरूर परिवर्तन आता।

अब चुनाव सर पर है, वोटर पूछेगा कि भाजपा के नेताओं तुमने सरकार की योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, घर घर शौचालय योजना, कोरोना काल मे मिली सहायता योजना का लाभ हिन्दुओं को कितना दिलवाया है, तो इनके पास इसका जवाब नहीं है। जब नगर की हिन्दू मुस्लिम जनसंख्या 40 और 60 प्रतिशत है तो योजनाओं का लाभ भी इसी अनुपात मे मिलना चाहिए, लेकिन ऐसा नही हुआ है। सरकारी योजनाओं का लाभ हिन्दू को मात्र 20 प्रतिशत तथा गैर हिन्दू को 80 प्रतिशत मिला है। इसका बड़ा कारण विपक्षी पार्टी के नेताओं ने अपने वोटरों को घर-घर जाकर जागरूक किया और आने वाली योजनाओं के उनके फार्म भरवाये और लाभ दिलवाया है।

नगरपालिका में कोई सुधार नही हुआ और बड़ी संख्या में बाहर से आये राष्ट्रविरोधी तत्व यहां नगर और क्षेत्र में घुस कर जम गये हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस ओर ध्यान देते हुए यहां नगर में व्यापक सर्च अभियान चलवायें तथा कुछ वर्षों में यहा बसे लोगों की जांच कराकर बांग्लादेशियों व रोहंगियाओं को बाहर का रास्ता दिखायें। नगर में बड़े स्तर पर सुविधा केन्द्रों की आड़ में चल हे फर्जी आधार, वोटर कार्ड, राशन कार्ड तथा पासपोर्ट बनाने के धंधे की उच्चस्तरीय जांच कराई जाये।

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