spot_img
spot_img
Thursday, January 29, 2026
spot_img

राम मंदिर के फैसले को रद्द करने की मांग करने वाले वकील पर लगा 6 लाख का जुर्माना

नई दिल्ली (महानाद) : पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआइ) डीवाई चंद्रचूड के बयान को आधार बनाते हुए राम मंदिर के फैसले को रद्द कराने की मांग करने वाले वकील महमूद प्राचा पर दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने 6 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माना लगाते हुए अदालत ने कहा कि याचिका तुच्छ, भ्रमपूर्ण और न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग करने वाली है।

आपको बता दें कि वकील महमूद प्राचा ने अपनी याचिका में 2019 के सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद के फैसले को शून्य और अमान्य घोषित करने की मांग करते हुए दावा किया था कि उस समय के न्यायाधीश (पूर्व सीजेआइ) डीवाई चंद्रचूड़ ने एक भाषण में स्वीकार किया था कि अयोध्या का फैसला भगवान श्री राम लला विराजमान द्वारा प्रदत्त समाधान था, जिससे न्यायिक निष्पक्षता पर सवाल उठता है।

फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने स्पष्ट किया कि जस्टिस चंद्रचूड़ के भाषण का गलत अर्थ निकाला गया, उन्होंने केवल ईश्वर से मार्गदर्शन की प्रार्थना करने की बात कही थी, जो पूरी तरह आध्यात्मिक अभिव्यक्ति थी, न कि किसी प्रकार का पक्षपात या बाहरी प्रभाव। उन्होंने कहा कि अपीलकर्ता कानूनी व्यक्तित्व और ईश्वर के बीच के फर्क को समझने में असफल रहे।

न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने जजेज प्रोटेक्शन एक्ट, 1985 का हवाला देते हुए कहा कि न्यायाधीशों के विरुद्ध इस तरह की दीवानी कार्रवाई प्रतिबंधित है। अदालत ने महमूद प्राचा के कदम को कानून को मजाक बनाने की प्रवृत्ति बताते हुए कहा कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए कड़ा जुर्माना लगाया जाना आवश्यक है।

न्यायाधीश राणा ने कहा कि कुछ लोग न्यायपालिका और सार्वजनिक पदाधिकारियों को बदनाम करने के लिए कोर्ट दुरुपयोग कर रहे हैं। स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब रक्षक ही शिकारी बन जाए।

अदालत ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए प्राचा की अपील खारिज कर दी और उन पर लगाया गया 1 लाख का जुर्माना बढ़ाकर 6 लाख रुपये कर दिया।

#ram_mandir advocate_jurmana

Related Articles

- Advertisement -spot_img

Latest Articles