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Friday, February 20, 2026
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खत्म हो जायेगी जौहर यूनिवर्सिटी? 458.5 एकड़ जमीन वापिस लेगी योगी सरकार

शिशिर भटनागर
रामपुर (महानाद) : आजम खां को हाईकोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। जौहर ट्रस्ट के पास अब केवल 12.50 एकड़ जमीन ही रहेगी। अधिग्रहण के खिलाफ दायर याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है।

बता दें कि सपा सांसद आजम खां की मौलाना मौहम्मद अली जौहर ट्रस्ट रामपुर की कुल 471 एकड़ जमीन में से अब ट्रस्ट के पास सिर्फ 12.50 एकड़ जमीन ही बाकी रहेगी। बाकी जमीन का अधिग्रहण रद्द करते हुए राज्य सरकार द्वारा वापस लिए जाने को चुनौती देने वाली आजम खां की याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। विदित हो कि एडीएम वित्त रामपुर के आदेश पर 458.5 एकड़ जमीन का अधिग्रहण रद्द कर दिया था, जिसे इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।

मामले में सुनवाई के पश्चात इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं सपा सासंद मौहम्मद आजम खां के मौलाना मौहम्मद अली जौहर ट्रस्ट रामपुर द्वारा अधिग्रहीत 12.50 एकड जमीन के अतिरिक्त जमीन को राज्य में निहित करने के एडीएम वित्त के आदेश को सही करार दिया है।

बता दें कि सपा सांसद आजम खां ने यूनिवर्सिटी निर्माण के लिए 7.11.2005 को लगभग 471 एकड जमीन अधिग्रहीत की थी। इस जमीन में से 12.50 एकड़ में यूनिवर्सिटी बनाने की सीलिंग की गई। 17.01.2006 को 45.1 एकड़ जमीन तथा 16.09.2006 को 25 एकड़ अतिरिक्त जमीन की मंजूरी दी गई। उपजिलाधिकारी द्वारा दी गई रिपोर्ट में कहा गया कि 24,000 वर्ग मीटर जमीन में ही निर्माण कार्य कराया जा रहा है। निर्माण कार्य में शर्तों का उल्लघंन किया गया है।

वहीं याची के वकील का कहना था कि ट्रस्ट के अध्यक्ष मौहम्मद आजम खां, सचिव डॉ. ताजीन फातिमा व सदस्य अब्दुल्ला आजम खां 26.02.2020 से सीतापुर जेल में बंद हैं। उपजिलाधिकारी की रिपोर्ट एकपक्षीय है। जेल में बंद अध्यक्ष व सचिव को नोटिस नहीं दिये गये हैं।

वहीं, हाईकोर्ट ने कहा कि अनुसूचित जाति की जमीन बिना डीएम की अनुमति के अवैध रूप से ली गई है। अधिग्रहण शर्तों का उल्लंघन कर शैक्षिक कार्य के लिए निर्माण के बजाय मस्जिद का निर्माण कराया गया। ग्रामसभा की सार्वजनिक उपयोग की चक रोड जमीन व नदी किनारे की सरकारी जमीनें ले ली गई। किसानों से जबरन बैनामा करवाया गया, जिसमें 26 किसानों ने सपा सांसद व ट्रस्ट के अध्यक्ष आजम खां के खिलाफ मुकदमें दर्ज करवाये हैं।

उधर, सरकार का तर्क था कि यूनिवर्सिटी बनाने के लिए अनुसूचित जाति की जमीन बिना अनुमति के ली गई। ऐसा अधिग्रहण अवैध है। ग्रामसभा व नदी किनारे की सार्वजनिक उपयोग की जमीन ले ली गई। शत्रु संपत्ति की जमीन भी मनमाने तरीके से ले ली गई। अधिग्रहण की शर्तों के विपरीत जाकर यूनिवर्सिटी परिसर में मस्जिद का निर्माण कराया गया। शासन की कार्यवाही नियमानुसार है। ट्रस्ट को सरकार ने 7.11.2005 को शर्तों के अधीन जमीन दी थी। जिसमें स्पष्ट था कि शर्तों का उल्लंघन करने पर उक्त जमीन वापस राज्य सरकार वापस ले लेगी।

हाईकोर्ट के जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल ने आदेश देते हुए कहा कि यूनिवर्सिटी का निर्माण 5 साल में पूरा होना था, लेकिन वार्षिक रिपोर्ट नहीं दी गई। उन्होंने कानूनी उपबंधों व शर्तों का उल्लंघन करने के आधार पर जमीन राज्य में निहित करने के आदेश पर हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया। आजम खां की याचिका पर अधिवक्ता एसएसए काजमी व अपर महाधिवक्ता अजीत कुमार सिंह व अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता सुधांशु श्रीवास्तव ने बहस की।

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