रुद्रपुर (महानाद) : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण को लेकर चलाए जा रहे प्रयास अब ज़मीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। राज्य सरकार की योजनाओं और स्वयं सहायता समूहों की ताकत से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी विकास खण्ड रुद्रपुर के पुलभट्टा क्षेत्र के ग्राम सतुइया की रहने वाली ग्रहिणी अमनदीप कौर की है।
अमनदीप कौर पहले एक सामान्य गृहिणी के रूप में अपना जीवन व्यतीत कर रही थीं। हालांकि विवाह से पहले उन्हें सिलाई-कढ़ाई का लगभग 8 वर्षों का अनुभव था, लेकिन घरेलू जिम्मेदारियों और सीमित संसाधनों के कारण वह अपनी इस प्रतिभा का उपयोग नहीं कर पा रही थीं। परिवार के भरण-पोषण में आर्थिक चुनौतियाँ भी सामने आ रही थीं, जिससे उनके सामने आत्मनिर्भर बनने की इच्छा तो थी, लेकिन सही मंच और अवसर की कमी थी।
इसी दौरान अमनदीप कौर ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपने जीवन में बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाया। वे हैप्पी स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं और इसके बाद केसरी ग्राम संगठन तथा संघर्ष क्लस्टर के माध्यम से सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाने लगीं। समूह की नियमित बैठकों में उनकी सक्रिय भागीदारी, लगन और सीखने की इच्छा को देखकर अधिकारियों ने उन्हें ग्रामोत्थान रीप परियोजना के अंतर्गत व्यक्तिगत उद्यम योजना की जानकारी दी।
इस योजना की जानकारी अमनदीप कौर के जीवन में एक नई उम्मीद लेकर आई। उन्होंने साहस दिखाते हुए स्वयं का व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया और सिलाई-कढ़ाई के अपने अनुभव को आधार बनाकर एक बुटीक स्थापित करने की योजना बनाई।
बुटीक की स्थापना में कुल लगभग 3 लाख रुपये की लागत आई। इसमें योजना के अंतर्गत उन्हें 2 लाख 15 हजार रुपये का बैंक ऋण प्राप्त हुआ, जिसमें 75 हजार रुपये की सब्सिडी का लाभ मिला। इसके अतिरिक्त अमनदीप कौर ने स्वयं भी 75 हजार रुपये का निवेश किया। इस सहयोग और अपने परिश्रम के बल पर उन्होंने अपने गांव में ही सफलतापूर्वक बुटीक की शुरुआत कर दी।
आज अमनदीप कौर अपने बुटीक के माध्यम से हर महीने लगभग 10-15 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। यह आय न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना रही है, बल्कि उन्हें आत्मसम्मान और आत्मविश्वास भी दे रही है। गांव की अन्य महिलाएं भी उनसे प्रेरणा लेकर स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने और स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने लगी हैं।
अमनदीप कौर की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि सही मार्गदर्शन, सरकारी योजनाओं का सहयोग और महिलाओं का आत्मविश्वास एक साथ मिल जाए तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़े परिवर्तन संभव हैं। धामी सरकार की नीतियां और योजनाएं आज प्रदेश की हजारों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
अमनदीप कौर की कहानी केवल एक महिला की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड में महिला सशक्तिकरण की नई तस्वीर को भी दर्शाती है, जहाँ महिलाएं अब केवल घर की जिम्मेदारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक रूप से भी सशक्त होकर प्रदेश के विकास में योगदान दे रही हैं।



