महानाद डेस्क : मैकाले की शिक्षा नीति को फॉलो करते-करते देश में नौकरों की संख्या बढ़ती जा रही है। आज भी मां-बाप अपने बच्चों को नौकरी करने के लिए पढ़ा रहे हैं, मालिक बनने के लिए नहीं।
जी हां, जब हमारे देश में अंग्रेजों का राज था तो मैकाले की श्क्षिा नीति लागू हुई जो भारतीयों को केवल नौकर बनने के लिए प्रेरित करती थी, क्योंकि मालिक तो अंग्रेज थे ही। सन 1947 में अंग्रेज देश छोड़कर चले गये, लेकिन मैकाले की नीति ने भारतियों का पीछा नहीं छोड़ा और मां-बाप अपने बच्चों को नौकर बनाने वाली शिक्षा देते चले आये। यह डॉयलॉग फेमस हो गया कि ‘पढ़ ले, ढंग की नौकरी मिल जायेगी’।
धीरे-धीरे देश की जनसंख्या बढ़ती चली गई। नौकरी देने वालों की संख्या घट गई, नौकरी मांगने वालों की संख्या बढ़ गई, जिससे देश में बेरोजगारों की संख्या भी बढ़ गई। आज जिन बच्चों के मां-बाप छोटे शहरों में रहते हैं और अपनी दुकाने चलाते हैं, उनके बच्चे भी बीटेक की डिग्री लेकर नौकरी मांगने वालों की कतार में खड़े हो गये और अपनी शिक्षा को उच्च मानते हुए अपने पिता के बिजनेस को आगे बढ़ाने को हेय दृष्टि से देखने लगे।
नौकरी की चाहत रखने वाले बच्चों की संख्या इतनी बढ़ चुकी है कि अब शिक्षण संस्थान भी बच्चों को सलाह देने लगे हैं कि आने वाले समय में नौकरी के लिए स्कोप नहीं है, इसलिए जिन बच्चों के पिता बिजनेस कर रहे हैं वे उसी बिजनेस को आगे बढ़ाने में जुट जायें। इससे फायदा भी होगा कि जहां एक बच्चा बेरोजगार नहीं होगा, वहीं वह अपने मां-बाप का सहारा बनेगा और अपने बिजनेस में 1-2 लोगों को रोजगार भी देगा।
बुजुर्गों का शहर बनने से बच जायेंगे छोटे शहर –
जो भी बच्चे आज उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं उनके लिए नौकरी के अवसर बड़े शहरों में मिलते हैं, जिस कारण वे अपने छोटे शहर में अपने मां-बाप को अकेला छोड़ देते हैं। ऐसे में छोटे शहर आने वाले कल में बुजुर्गों का शहर बन जायेंगे, जहां उनकी देखभाल करने वाला भी कोई नहीं होगा।
मां-बाप की सुरक्षा के लिए भी अपने छोटे शहर लौटना जरूरी –
जहां आज की तारीख में आपको नौकरी पाने के लिए, तरक्की के लिए बड़े शहरों में धक्के खाने हैं, वहीं अपने मां-बाप और उनके बिजनेस, घर की सुरक्षा के लिए भी आपको अपने छोटे शहर लौटना जरूरी है। जिस तरह से आज छोटे शहरों में रहने वाले मां-बाप लुट रहे हैं, उनकी हत्यायें हो जा रही हैं, प्रोपर्टी पर कब्जा हो जा रहा है, उसके लिए बच्चों का उनके पास रहना बहुत जरूरी हो गया है।
यदि आप अपने छोटे शहरों में अपने पिता के पारंपरिक बिजनेस को जॉइन करते हैं, तो यदि आपकी कमाई कम भी होगी तो छोटे शहरों के खर्चे भी कम हैं और फिर यदि आपने उच्च शिक्षा प्राप्त की है तो उसका उपयोग अपने बिजनेस को बड़ा बनाने में करके मालिक की फीलिंग लीजिए नौकर की नहीं।



