spot_img
spot_img
Wednesday, April 15, 2026
spot_img

अंतरराष्ट्रीय कंपनी की सीनियर मैनेजर बनकर ठगे 29 लाख रुपये, एसटीएफ मास्टर माइंड को पकड़ कर लाई दिल्ली से

सुहानी अग्रवाल
देहरादून (महानाद) : एसटीएफ उत्तराखंड की साइबर क्राइम टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अंतरराष्ट्रीय कंपनी का सीनियर मैनेजर बनकर देहरादून के पीड़ित से 29 लाख रुपये ठगने वालेे नाइजीरियन साइबर ठग को दिल्ली से गिरफ्तार कर करोड़ों के अंतरराष्ट्रीय पार्सल फ्रॉड के जाल को तोड़ दिया।

CEO, Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C), MHA, डॉ. राजेश कुमार के मार्गदर्शन में I4C द्वारा देशभर में साइबर कमांडो तैयार किए जा रहे हैं। इसी क्रम में, उत्तराखंड की साइबर कमांडो टीम ने यह पहला बड़ा मामला उजागर कर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। बहुत जल्द उत्तराखंड के 70 साइबर कमांडो को और उन्नत प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा, जिससे राज्य में साइबर अपराधों पर और प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।

मामले की जानकारी देते हुए एसएसपी एसटीएफ नवनीत सिंह ने बताया कि देहरादून निवासी शिकायतकर्ता द्वारा माह जुलाई 2025 में शिकायत दर्ज कराकर बताया कि फेसबुक पर एक महिला ने स्वयं को एम्स्टर्डम स्थित एक नामी फार्मा कंपनी की सीनियर मैनेजर बताते हुए मित्रता की। विश्वास जीतकर उसने नकली पार्सल भेजने का बहाना बनाया और फ्लोटा लॉजिस्टिक के नाम पर कस्टम स्कैनिंग, गोल्ड लाइसेंस, करेंसी कन्वर्जन, जीएसटी, बीमा, क्लियरेंस, और अन्य शुल्कों के बहाने लगातार ऑनलाइन भुगतान करवाए। परन्तु स्वयं के साथ हो रही साइबर फ्रॉड का अंदेशा नहीं हो पाया, जिससे पीड़ित द्वारा विभिन्न बैंक खातों में कई किश्तों में 24,88,400 रुपये स्थानांतरित किए गए। इसके बाद कथित ‘राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा’ अधिकारियों और नकली पुलिसकर्मियों ने फर्जी केस निपटाने, नाम हटाने और फाइल आगे बढ़ाने के बहाने अतिरिक्त 4,10,250 रुपये अवैध रूप से प्राप्त किए। आरोपियों ने अनेक फर्जी मोबाइल नंबर, बैंक खाते और सरकारी पदनामों का दुरुपयोग करते हुए प्रलोभन एवं दबाव के माध्यम से पीड़ित को निशाना बनाकर संगठित साइबर धोखाधड़ी से कुल 28,98,650 की धोखाधड़ी की।

मामले की गम्भीरता को देखते हुएसएसपी एसटीएफ उत्तराखण्ड के दिशा निर्देशन में मामले का पर्यवेक्षण अपर पुलिस अधीक्षक स्वप्न किशोर, पुलिस उपाधीक्षक अंकुश मिश्रा एवं विवेचना निरीक्षक आशीष गुसाई साईबर क्राईम पुलिस स्टेशन, देहरादून के सुपुर्द कर आवश्यक दिशा निर्देश दिये गये । साइबर क्राइम पुलिस द्वारा घटना में प्रयुक्त मोबाइल नंबरों, बैंक खातों, व्हाट्सएप चैट, फेसबुक मैसेंजर वार्तालाप, पार्सल ट्रैकिंग डोमेन एवं संबंधित डिजिटल माध्यमों की जानकारी हेतु बैंकों, टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स, डोमेन होस्टिंग कंपनियों एवं मेटा कंपनी से पत्राचार कर डेटा प्राप्त किया गया। प्राप्त डेटा के विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ कि साइबर अपराधियों ने फर्जी अंतरराष्ट्रीय पार्सल भेजने का झांसा देकर एवं स्वयं को सरकारी अधिकारी/राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा अधिकारी बताकर, पीड़ित से विभिन्न बैंक खातों में 28,98,650 रुपये की राशि स्थानांतरित करवाई।

पुलिस टीम द्वारा तकनीकी/डिजिटल साक्ष्य एकत्र कर घटना के Colinus Ugochukwu Nwaemuka s/o Nwaemuka R/O IMO state Nigeria (नाइजीरियन नागरिक) को चिन्ह्ति करते हुये अभियुक्त की तलाश जारी की। साईबर टीम द्वारा बीएनएसएस के अन्तर्गत प्रकाश में आये अभियुक्तUgochukwu Nwaemuka की तलाश दिल्ली जाकर की गयी व अग्रिम विवेचनात्मक कार्यवाही बीएनएसएस के अन्तर्गत की गई और उसे गिरफ्तार किया गया।

एसएसपी ने बताया कि अभियुक्त द्वारा पहले फेसबुक पर नकली प्रोफाइल बनाकर स्वयं को एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय कंपनी की सीनियर मैनेजर के रूप में प्रस्तुत किया। पीड़ित से मित्रता कर विश्वास हासिल किया और अंतरराष्ट्रीय पार्सल भेजने का बहाना बनाया। पार्सल ट्रैकिंग वेबसाइट एवं नकली कस्टम एजेंटों के माध्यम से स्कैनिंग शुल्क, गोल्ड लाइसेंस, करेंसी कन्वर्जन, बीमा, जीएसटी, क्लीयरेंस आदि के नाम पर कई बार धनराशि की मांग की गई। इसके बाद, आरोपियों ने ‘राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा’ अधिकारी एवं पुलिसकर्मी बनकर पीड़ित को फर्जी केस में फंसाने, नाम हटाने और फाइल आगे बढ़ाने के बहाने अतिरिक्त राशि जमा करवाई। इस पूरे अपराध में अनेक फर्जी मोबाइल नंबर, बैंक खाते, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और पार्सल ट्रैकिंग डोमेन का प्रयोग किया गया, जिसके माध्यम से कुल 28,98,650 रुपये की ठगी को अंजाम दिया गया।

प्रारम्भिक पूछताछ में अभियुक्त ने साईबर अपराध हेतु जिस बैंक खातों का प्रयोग किया गया है उसमें मात्र कुछ माह में ही करोड़ों रुपयों का लेन-देन होना प्रकाश में आया है। जाँच में यह भी प्रकाश में आया है कि अभियुक्तगण के विरुद्ध देश के कई राज्यों में साईबर अपराधों में एफआईआर व अन्य शिकायतें दर्ज हैं । जिसके सम्बन्ध में जानकारी हेतु अन्य राज्यों की पुलिस के साथ संपर्क किया जा रहा है ।

अभियुक्त के पास से 15 मोबाइल फोन, 5 बैंक एटीएम कार्ड, 10 सिम काड, 2 पासपोर्ट, 1 जियो का वाईफाई डोंगल, 1 लैपटॉप तथा 1 पैन कार्ड बरामद हुए हैं।

पुलिस टीम में निरीक्षक आशीष गुसाई, एसआई हिम्मत सिंह, कां. मोहित, सुधीष खत्री शामिल थे।

एसएसपी नवनीत सिंह ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के लोक लुभावने अवसरों/फर्जी साईट/धनराशि दोगुना करने व टिकट बुक करने वाले अन्जान अवसरो के प्रलोभन में न आयें। साथ ही, सभी से अपील है कि वे फर्जी निवेश ऑफर जैसे यूट्यूब लाइक, सब्सक्राइब, टेलीग्राम आधारित निवेश वेबसाइट ऑफर में निवेश न करें, किसी भी अन्जान व्यक्ति से सोशल मीडिया पर दोस्ती न करें, अन्जान कॉल आने पर लालच में न आये, कॉलर की सत्यता की जांच करे बिना किसी भी प्रकार की सूचना / दस्तावेज न दें। ऑनलाईन जॉब हेतु एप्लाई कराने से पूर्व उक्त साईट का पूर्ण वैरीफिकेशन सम्बन्धित कम्पनी आदि से भलीं भांति अवश्य करा लें तथा गूगल से किसी भी कस्टमर केयर नम्बर को सर्च न करें। तेजी से बढ़ रहे इन्वेस्टमेंट स्कैम्स ने लाखों लोगों को अपना शिकार बनाया है। स्कैमर्स वेबसाइट्स और नकली रिव्यू प्रोग्राम्स के माध्यम से लोगों को पहले छोटे-छोटे इनाम देकर भरोसा जीतते हैं तथा फिर धीरे-धीरे उन्हें भारी रकम निवेश करने पर मजबूर कर देते हैं। कम समय में अधिक लाभ के चक्कर में इन्वेस्ट ना करें व शक होने पर तत्काल निकटतम पुलिस स्टेशन या साइबर क्राईम पुलिस स्टेशन को सम्पर्क करें। वित्तीय साईबर अपराध घटित होने पर तुरन्त 1930 नम्बर पर सम्पर्क करें।

Related Articles

- Advertisement -spot_img

Latest Articles