करनाल (महानाद) : सरकारी जमीन को अवैध रूप से निजी हाथों में पहुंचाने के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट खुशबू गोयल की अदालत ने तहसीलदार सहित 13 दोषियों को 5-7 साल की कैद और जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने कहा कि आरोपियों ने सुनियोजित ढंग से फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी भूमि को हड़पने की कोशि की।
अदालत के अनुसार पूरे मामले में पंचायत स्तर से लेकर राजस्व विभाग तक के अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई है। फर्जी आवंटन पत्र बनाए गए, जमीन की खरीद-फरोख्त के झूठे दस्तावेज तैयार किए गए तथा सरकारी रिकॉर्ड में अवैध तरीके से बदलाव किए गए। अदालत ने इसे गंभीर आपराधिक साजिश करार दिया।
कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में नरमी दिखाना समाज और शासन व्यवस्था दोनों के लिए गलत संदेश देगा। दोषियों पर 5 लाख 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है, जिसे राज्य को हुए नुकसान की आंशिक भरपाई माना गया है। जुर्माना अदा न करने पर अतिरिक्त सजा का भी प्रावधान रखा गया है।
वहीं, एक आरोपी के फरार होने के चलते कोर्ट ने उसकी गिरफ्तारी तक केस रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारी संपत्ति की रक्षा न्यायपालिका की जिम्मेदारी है और भूमि घोटालों पर कठोर दंड आवश्यक है।



