हरिद्वार (महानाद) : जीआरपी एसपी अरुणा भारती के नेतृत्व में जीआरपी हरिद्वार की टीम ‘मेरा मामा टीटी है’ गैंग के दो शातिरों को हरिद्वार से लगभग 1100 किलोमीटर दूर नेपाल बॉर्डर, सीतामढ़ी, बिहार से पकड़ कर ले आई। उक्त गैंग के सदस्य बिहार, झारखंड, फैजाबाद के भोले भाले लोगों को ठगकर मोबाइल व बैंक अकाउंट साफ कर देते थे। एक शातिर से पीड़ित का मोबाइल बरामद हुआ तो दूसरे से पीड़ित का सिम अपने मोबाइल में यूपीआई ट्रांजैक्शन हेतु प्रयोग करने पर मोबाइल जब्त किया गया।
कहते हैं कि अपराधी कितना ही शातिर क्यों न हो एक न एक दिन कानून के चंगुल में फंसकर जेल पहुंचे ही जाता है। कुछ ऐसा ही हुआ हरिद्वार रेलवे स्टेशन के बीते कुछ दिनों में, जब बिहार झारखंड की तरफ के भोले भाले गरीब मजदूर वर्ग को बिहार के ही कुछ शातिर बदमाशों द्वारा बिहारी भाषा में बात करते हुए अपनी चिकनी चुपड़ी बातों में फंसा कर उन सीधे-साधे लोगों के मोबाइल फोन, पिन, आधार कार्ड व बैंक अकाउंट को खाली किया जा रहा था, जिनको कप्तान जीआरपी अरुणा भारती के तेजतर्रार नेतृत्व में जीआरपी हरिद्वार पुलिस द्वारा लगभग 1100 किलोमीटर दूर नेपाल बॉर्डर के नजदीक सीतामढ़ी, बिहार से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
आपको बता दें कि रेलवे स्टेशन, हरिद्वार में विगत कुछ समय से बिहार के कुछ बदमाशों द्वारा बिहार, झारखंड, फैजाबाद, यूपी की तरफ के मजदूर वर्ग के लोगों को टारगेट करते हुए उनके रेलवे के साधारण किराए के टिकट को स्लीपर क्लास अथवा एक 3 टियर में कंफर्म करने के नाम पर अंग्रेजी में फार्म भरवाने के चलते अपनी बिहारी भाषा में झांसे में लेकर धोखाधड़ी करते हुए पीड़ित का मोबाइल फोन, आधार कार्ड, पिन लेकर बैंक अकाउंट खाली कर दिया जा रहा था। जिस पर दिनांक 24 जनवरी 2026 को मनोज कुमार तिवारी निवासी ग्राम मंझनपुर, फैजाबाद, उत्तर प्रदेश द्वारा तहरीर दी गई कि 31-12-26 को वह अपने घर फैजाबाद, अयोध्या, उत्तर प्रदेश जा रहा था, उसका रिजर्वेशन नहीं हो पाया था, तब अपने रिश्तेदार को रेलवे का अधिकारी बताकर ठग द्वारा रिजर्वेशन पक्का कराने के नाम पर उसे विश्वास में लेते हुए उसका मोबाइल, आधार कार्ड और पिन ले लिया तथा कुछ दिन बाद जब वह गांव में अपने बैंक गया तब उसे पता चला कि उसकेे अकाउंट से यूपीआई के माध्यम से 60,500 रुपए दो खातों में ट्रांसफर किए गए हैं। तहरीर के आधार पर थाना जीआरपी हरिद्वार में धारा 303(2), 318(4) बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरु की गई।
जांच के दौरान बैंक से पत्राचार करने के पश्चात प्राप्त बैंक खातों के ट्रांजैक्शन की डिटेल्स के आधार पर प्रकाश में आए प्रहलाद सिंह निवासी ग्राम रंगमती, तहसील गोयलकेरा, वेस्ट सिंहभूमि, झारखंड के मोबाइल नंबर की जानकारी की गई एवं विभिन्न नंबरों को चेक करने के बाद चल रहे एक नंबर की लोकेशन के आधार पर दिनांक 13-02-2026 को सब इंस्पेक्टर प्रमोद कुमार के नेतृत्व में एक टीम थाना दसुवा, जिला होशियारपुर, पंजाब भेजी गई। जहां ग्राम दोलोवाल में एक आरा मशीन पर मौजूद मिले प्रहलाद सिंह से पुलिस टीम द्वारा पूछताछ करने पर उसके द्वारा बताया गया कि दिनांक 22.12.2025 को तपोवन, जोशीमठ कंपनी में काम करने के बाद हरिद्वार आया था, उसे अपने गांव रंगामती थाना गोईलखेरा, झारखंड जाने के लिए उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन पकड़नी थी जिस कारण एक दिन पहले वह शाम को बस अड्डे, हरिद्वार में उतरा और पहाड़ के लंबे सफर के कारण चक्कर आने पर वहीं साइड में बैठ गया और उसकी आंख लग गई, जब उठा तो उसका मोबाइल, आधार कार्ड, बैंक पासबुक आदि गायब थे। काफी तलाश करने पर नहीं मिला तो वह जालंधर वाली रोडवेज बस में बैठकर पंजाब चला आया। यहां दोबारा अपना आधार कार्ड निकलवाया और नया सिम लिया। उसे गूगल पे चलाना नहीं आता है। वह अपने बैंक के काम अपने ठेकेदार के माध्यम से ही कराता है। बदमाश ठग लोगों ने उसके मोबाइल और सिम नंबर का प्रयोग अपने गलत कामों के लिए किया होगा।
उपरोक्त जानकारी के बाद हरिद्वार जीआरपी पुलिस द्वारा दिन-रात मेहनत करते हुए बैंक से पत्राचार कर एवं एसओजी, जीआरपी एवं साइबर टीम हरिद्वार से जानकारी एकत्र करते हुए प्राप्त कई सारी टेक्निकल रिपोर्ट्स एवं सीडीआर का मंथन करने के बाद अभियुक्तों के सीतामढ़ी, बिहार में होने की जानकारी प्रकाश में आने पर जीआरपी पुलिस टीम द्वारा सिरसिया बाजार, थाना बेला, जिला सीतामढ़ी, बिहार से उपरोक्त मुकदमे से संबंधित दो अभियुक्तों राजेश कुमार (31 वर्ष) पुत्र स्व. भिखारी चौरसिया निवासी वार्ड नंबर 14, सिरसिया बाजार, थाना बेला, जिला सीतामढ़ी, बिहार एवं विपिन कुमार (31 वर्ष) पुत्र राज किशोर महतो निवासी वार्ड नंबर 6, सिरसिया बाजार, थाना बेला, जिला सीतामढ़ी, बिहार को गिरफ्तार कर लोकल कोर्ट में पेश कर ट्रांजिट रिमांड पर हरिद्वार लाकर कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया।
दोनों अभियुक्त इतने शातिर थे कि अपनी पहचान छुपाने के लिए एक अभियुक्त पीड़ित का मोबाइल किसी और सिम का प्रयोग करते हुए चोरी करने में इस्तेमाल करता था एवं दूसरा अभियुक्त पीड़ित प्रहलाद सिंह के सिम का उपयोग भोले भाले लोगों की खून पसीने की कमाई को यूपीआई ट्रांजैक्शन के लिए किसी दूसरे मोबाइल का इस्तेमाल करते हुए उपयोग में लाता था। दोनों अभियुक्तों राजेश एवं विपिन द्वारा बताया गया कि उनके इस काम में रामकिशोर यादव पुत्र रामसेवक राय भी शामिल रहता था जिसको हरिद्वार, जीआरपी पुलिस द्वारा कुछ दिन पूर्व ही गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है जो अभी तक जेल के अंदर निरुद्ध है।
उपरोक्त पेचीदा केस को टैक्निकल तरीके से सुलझाने में सब इंस्पेक्टर प्रमोद कुमार एवं एसओजी के दीपक चौधरी एवं करुणेश कुमार की विशेष भूमिका रही। अभियुक्त इतने शातिर थे कि कैमरों से छुपकर अपना काम करते थे और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के किसी भी काम में मोबाइल अथवा सिम, भी चोरी का ही इस्तेमाल करते थे एवं कुछ घटना करने के बाद मोबाइल व सिम फेंक देते थे। जिस कारण इनको पकड़ना बेहद कठिन था। यह शातिर ठग घटना में बिहार, झारखंड, फैजाबाद व गोरखपुर की तरफ के लोगों को ही टारगेट करते थे और अपनी लोकल बोली भाषा में बात करके जल्दी ही अपने शिकार के साथ घुलमिल जाते थे। केवल 5-7 दिन ही एक स्थान पर रहते थे उसके बाद अपनी दूसरी टीम को बताकर उस स्थान को छोड़कर अन्य कहीं ठगी करने चले जाते थे जिस कारण पीड़ित व्यक्ति अथवा पुलिस इन तक नहीं पहुंच पाती थी लेकिन इस बार जीआरपी हरिद्वार पुलिस द्वारा इलेक्ट्रॉनिक एवं मैन्युअल पुलिसिंग पर काम करते हुए इन शातिर चोरों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।
पुलिस टीम में प्रभारी जीआरपी बिपिन चंद्र पाठक, सब इंस्पेक्टर प्रमोद कुमार , कां. जितेंद्र पांचाल, अंकुर सिंह, संदीप राणा, करुणेश सिंह एसओजी जीआरपी, कां. दीपक चौधरी एसओजी जीआरपी।



