रामनगर (महानाद) : कॉर्बेट स्थित एक रिसोर्ट में हिमसायकोन 2026 (HimPsyCon 2026) का आयोजन किया गया। हिमसायकोन 2026 के सफल आयोजन के केंद्र में एक समर्पित, ऊर्जावान और दूरदर्शी टीम रही, जिसने इस सम्मेलन को एक यादगार अनुभव में बदल दिया।

सम्मेलन के चेयरपर्सन डॉ. मनोज त्रिवेदी के मार्गदर्शन में आयोजन को स्पष्ट दिशा और सशक्त नेतृत्व प्राप्त हुआ।
सम्मेलन के आयोजन सचिव डॉ. सिद्धांत माथुर एवं डॉ निकिता देओपा ने सूक्ष्म योजना, सटीक समन्वय और उत्कृष्ट नेतृत्व का परिचय देते हुए कार्यक्रम के हर पहलू को सहज और सुव्यवस्थित बनाया।
वैज्ञानिक सत्रों को उच्च गुणवत्ता एवं गहराई प्रदान करने में डॉ. ईश कुमार डल्ला की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही, जिनके मार्गदर्शन में अकादमिक स्तर पर समृद्ध एवं विचारोत्तेजक चर्चाएँ संभव हो सकीं। वहीं, वित्तीय प्रबंधन एवं संसाधनों के पारदर्शी और कुशल उपयोग में डॉ मिलन अरोरा ने विश्वसनीयता और दक्षता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।

उत्तराखंड की मनमोहक प्राकृतिक पृष्ठभूमि में आयोजित इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर से आए 300 से अधिक मनोचिकित्सकों, रेजिडेंट डॉक्टरों एवं मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सम्मेलन ने आधुनिक मनोचिकित्सा के उभरते आयामों—जैसे डिजिटल फिनोटाइपिंग, न्यूरोमॉड्यूलेशन, स्लीप मेडिसिन, डी-एडिक्शन, साइकोथेरपी एवं क्लिनिकल प्रैक्टिस के नवीन दृष्टिकोण—पर व्यापक और गहन चर्चा का मंच प्रदान किया।

कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित वैज्ञानिक सत्र, ई-पोस्टर प्रस्तुतियाँ, रिसेप्शन एरिया में इंटरैक्टिव डिस्कशन, तथा पीजी एवं यूजी क्विज़ ने युवा और वरिष्ठ चिकित्सकों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान को सशक्त बनाया। इन गतिविधियों ने प्रतिभागियों को न केवल अपने शोध को प्रस्तुत करने का अवसर दिया, बल्कि विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपने विचारों को और निखारने का भी मंच प्रदान किया।

हैंड्स-ऑन वर्कशॉप्स इस सम्मेलन की विशेष पहचान रही। RTMS (Repetitive Transcranial Magnetic Stimulation) पर आधारित कार्यशाला में तीन अलग-अलग स्टेशनों पर विशेषज्ञों द्वारा लाइव डेमोंस्ट्रेशन के माध्यम से प्रतिभागियों को आधुनिक न्यूरोमॉड्यूलेशन तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इससे प्रतिभागियों के क्लिनिकल कौशल और आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
नींद (Sleep) पर आयोजित विशेष सत्र में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि गुणवत्तापूर्ण नींद मानसिक स्वास्थ्य की आधारशिला है। अनिद्रा और अन्य नींद संबंधी विकार अवसाद, चिंता और कई मानसिक रोगों की जटिलता को बढ़ाते हैं, इसलिए इनके समय पर निदान और उपचार को प्राथमिकता देना अत्यंत आवश्यक है। इस सत्र का संचालन डॉ रवि गुप्ता द्वारा किया गया, जिन्होंने नींद विज्ञान को सरल, व्यावहारिक और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
सम्मेलन के दौरान प्रतिष्ठित विशेषज्ञों द्वारा दिए गए व्याख्यानों ने इस आयोजन को और भी समृद्ध बनाया। विशेष रूप से डॉ. टी.एस.एस. राव, डॉ. अरुण मरवाले, डॉ. राजेश सागर, डॉ. शोभित गर्ग एवं डॉ. प्रियरणजन अविनाश जैसे प्रख्यात वक्ताओं ने अपने अनुभव, शोध एवं दृष्टिकोण साझा कर प्रतिभागियों को नई दिशा और प्रेरणा प्रदान की।

हिमसायकोन 2026 ने यह सिद्ध किया कि जब वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सामूहिक प्रयास और समर्पण एक साथ आते हैं, तो मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में सार्थक परिवर्तन की राह प्रशस्त होती है। यह सम्मेलन न केवल एक अकादमिक आयोजन रहा, बल्कि सहयोग, नवाचार और भविष्य की संभावनाओं का एक जीवंत मंच बनकर उभरा।



