रामपुर (महानाद) : जौहर यूनिवर्सिटी और सपा नेता आजम खां से जुड़ी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। यूनिवर्सिटी के लिए जमीन से जुड़े विवाद के बाद अब आयकर विभाग ने जौहर ट्रस्ट से विश्वविद्यालय के निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुए खर्च का पूरा ब्योरा मांगा है। ट्रस्ट से जमीन खरीदने और उस पर किए गए खर्च के स्रोत की जानकारी भी मांगी गई है।
मामला सिर्फ आयकर विभाग तक सीमित नहीं है। अगर जांच में खर्च और धन के स्रोत को लेकर संतोषजनक जानकारी नहीं मिलती है, तो मामला प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) तक पहुंच सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, जांच एजेंसियां विश्वविद्यालय और ट्रस्ट से जुड़े बैंक खातों की भी जांच कर सकती हैं।
जौहर यूनिवर्सिटी में शत्रु संपत्ति की करीब 13.08 हेक्टेयर जमीन का मामला लंबे समय से विवादों में रहा है। इस जमीन से जुड़े मामले में आजम खां पर फर्जीवाड़े के आरोप हैं और मामला अदालत में विचाराधीन है। इसके अलावा यूनिवर्सिटी के विस्तार के लिए ग्राम समाज, चकरोड और किसानों की जमीन पर कब्जे के आरोपों को लेकर भी उनके खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए हैं।
आजम खां पर मंत्री रहते हुए जौहर ट्रस्ट के लिए सरकारी जमीन और इमारतों को बेहद कम दर पर लीज पर लेने के आरोप भी लग चुके हैं। सरकार बदलने के बाद इन मामलों में कार्रवाई हुई। जमीन से जुड़े विवादों के चलते आजम खां को भूमाफिया की सूची में भी शामिल किया जा चुका है।
अब आयकर विभाग ने जौहर ट्रस्ट के पुराने वित्तीय लेनदेन और विश्वविद्यालय के निर्माण पर हुए खर्च का हिसाब मांगा है। विभाग ने ट्रस्ट से यह बताने को कहा है कि विश्वविद्यालय के लिए जमीन खरीदने और निर्माण कार्य में कितना पैसा खर्च हुआ और यह रकम कहां से आई।
विश्वविद्यालय के निर्माण पर खर्च को लेकर भी अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। आजम खां की ओर से निर्माण पर करीब 46 करोड़ रुपये खर्च होने की बात कही गई थी, जबकि एक सरकारी एजेंसी ने इसकी लागत करीब 496 करोड़ रुपये आंकी थी। इसी अंतर को लेकर खर्च का पूरा हिसाब जांच के दायरे में है।
इसके अलावा ट्रस्ट को 11 फर्मों के जरिए भेजी गई करोड़ों रुपये की नकदी के लेनदेन का हिसाब भी जांच एजेंसियों के लिए अहम है। आयकर विभाग को अगर मांगे गए दस्तावेज और खर्च का संतोषजनक ब्योरा नहीं मिलता है, तो आगे की जांच के लिए मामला ईडी को भेजे जाने की संभावना बन सकती है।
फिलहाल जौहर ट्रस्ट ने आयकर विभाग से जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है। अब ट्रस्ट की ओर से दिए जाने वाले जवाब और दस्तावेजों पर आगे की कार्रवाई निर्भर करेगी।



