नई दिल्ली (महानाद) : चीनी के बढ़ते रेटों और इसके कारण बाजार में स्टॉक जमा करने की गतिविधियों को देखते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने होलसेल करने वाले चीनी उपभोक्ताओं/व्यापारियों के लिए स्टॉक रखने की सीमा तय कर दी है। अब बड़ी मात्रा में चीनी बेचने वाले उपभोक्ता/व्यापारी और संस्थान जरूरत से ज्यादा चीनी का स्टॉक करके नहीं रख सकेंगे।
उपभोक्ता मामलों, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, जो थोक उपभोक्ता हर महीने 10 मीट्रिक टन से ज्यादा चीनी का इस्तेमाल करते हैं, वे अधिकतम 15 दिनों की खपत के बराबर चीनी ही स्टॉक में रख सकेंगे। ऐसे उपभोक्ताओं/व्यापारियों को अपनी जरूरत के हिसाब से ही चीनी खरीदकर रखनी होगी।
1 सितंबर से यह नियम कई बड़े चीनी उपभोक्ताओं पर लागू होगा। जिनमें कन्फेक्शनरी का सामान बनाने वाली कंपनियां, सॉफ्ट ड्रिंक निर्माता, फूड प्रोसेसिंग उद्योग, मिठाई विक्रेता और अन्य संस्थागत खरीदार शामिल हैं। सरकार ने थोक उपभोक्ता की परिभाषा भी स्पष्ट की है। ऐसे संस्थान जो पिछले एक साल के दौरान औसतन हर महीने कम से कम 10 मीट्रिक टन चीनी का इस्तेमाल करते रहे हैं, उन्हें इस श्रेणी में रखा गया है। मौजूदा महीने की खपत को इस गणना में शामिल नहीं किया जाएगा।
केंद्र सरकार ने चीनी मिलों से बड़े उपभोक्ताओं को होने वाली बिक्री पर भी नजर रखने की व्यवस्था की है। प्रत्येक चीनी मिल द्वारा किसी थोक उपभोक्ता को सीधे या डीलरों के माध्यम से बेची गई चीनी की मात्रा की जांच की जाएगी। इसके लिए जीएसटी रिटर्न में दर्ज चीनी से जुड़े एचएसएन कोड का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे सरकार को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किस उपभोक्ता ने कितनी चीनी खरीदी और इस्तेमाल की है।
हालांकि इस स्टॉक सीमा से केंद्र और राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन और स्थानीय निकायों से जुड़े संस्थानों को बाहर रखा गया है। यानी इन सरकारी संस्थानों पर 15 दिन की स्टॉक सीमा लागू नहीं होगी।
सरकार द्वारा लगाई गई यह रोक 1 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगी। इस दौरान बड़े उपभोक्ताओं को अपनी चीनी की इन्वेंट्री 15 दिनों की खपत के स्तर के भीतर रखनी होगी।
#sugar_news



