नई दिल्ली (महानाद) : पहलवान विनेश फोगाट को दिल्ली हाई कोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने उन्हें 14 सितंबर को इंदिरा गांधी स्टेडियम में होने वाले सीनियर विश्व चैंपियनशिप के महिला चयन ट्रायल्स में शामिल होने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। हालांकि, सुनवाई के दौरान अदालत ने मातृत्व और महिला खिलाड़ियों के खेल करियर से जुड़ा एक बड़ा सवाल जरूर उठाया।
आपको बता दें कि विनेश फोगाट जुलाई 2025 में मां बनी थीं। मातृत्व अवकाश के बाद वह अब खेल में वापसी कर रही हैं और इस साल होने वाली सीनियर विश्व चैंपियनशिप के लिए चयन ट्रायल में हिस्सा लेना चाहती थीं। इसी मांग को लेकर उन्होंने हाई कोर्ट का रुख किया था।
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने अंतरिम आदेश में कहा कि फिलहाल सभी खिलाड़ियों पर लागू चयन मानदंडों में सिर्फ विनेश फोगाट के लिए छूट देना उचित नहीं होगा। अदालत के मुताबिक, ऐसा करने से उन अन्य खिलाड़ियों पर भी असर पड़ सकता है जो इस मामले में पक्षकार नहीं हैं।
कोर्ट ने कहा कि किसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए देश की टीम चुनने की प्रक्रिया निष्पक्ष, समान और प्रदर्शन आधारित होनी चाहिए। जब तक चयन नीति की वैधता और उसके लागू होने को लेकर अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक किसी एक खिलाड़ी के मामले में पात्रता नियमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
मातृत्व और खेल करियर के बीच संतुलन पर उठाया सवाल :
हालांकि, अदालत ने इस मामले में एक अहम मुद्दे पर विचार की जरूरत बताई। कोर्ट ने कहा कि सवाल सिर्फ विनेश फोगाट को ट्रायल में शामिल करने का नहीं है, बल्कि यह भी देखना होगा कि महिला खिलाड़ियों के मातृत्व और उनके खेल करियर के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। अदालत ने कहा कि एक महिला खिलाड़ी शादी करती है, बच्चे को जन्म देती है और उस दौरान पुरुष खिलाड़ी लगातार प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर पदक जीतते और क्वालिफाई करते रहते हैं। ऐसे में महिला खिलाड़ी को अपने बच्चे और करियर के बीच चुनाव करने की स्थिति में छोड़ना उचित नहीं हो सकता।
कोर्ट ने साफ किया कि मातृत्व और खेल करियर के बीच संतुलन का यह मुद्दा महत्वपूर्ण है और इस पर सावधानीपूर्वक विचार किए जाने की जरूरत है। हालांकि, मौजूदा सुनवाई में इस सवाल पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। अदालत ने यह भी कहा कि विनेश फोगाट को विशेष छूट देकर ट्रायल में शामिल करने की अनुमति देना समान स्थिति वाले दूसरे खिलाड़ियों के साथ असमान व्यवहार हो सकता है। साथ ही, इससे भविष्य में अन्य खिलाड़ी भी चयन मानदंडों में इसी तरह की छूट की मांग कर सकते हैं।



