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Friday, February 20, 2026
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आओ चलें गरीब बनने : प्रीति धारा

यतीश शर्मा
पंचकूला (महानाद) : वक्त जो ना किसी का हुआ ना किसी का होगा, उसका काम सिर्फ बदलना है और वो हर पल बदलेगा। अब जीवन की बात है कि उस वक्त को हम कैसे बदलें, उसे जिये या वक्त के सहारे छोड़ दें। आप सभी पाठक इस बात से हैरान होंगे कि सब अमीर बनना चाहते हैं और लेख लिखा जा रहा है, आओ चले गरीब बनने।

अब वक्त आ गया है दोस्तो गरीब बनने का, क्यूं ना हो फायदा बहुत है। बैंक खाते में सरकार पैसे डालेगी, सरकारी आवास मिलेगा, राशन पानी फ्री या काफी सस्ते में मिलेगी, मेडिकल सुविधा भी फ्री में मिलेगी। बच्चों की पढ़ाई लिखाई के लिए सरकार आगे आयेगी या कुछ अमीर दयालु मोर्चा संभाल लेंगे। अपना नाम चमकाने के चक्कर में या फोटो के चक्कर में उनको भी गरीब लोगों की तलाश रहती है। राजनेताओं का भाषण भी गरीबों के बिना अधूरा है। अगर गरीब न हो तो वो कैसे बोलेंगे की हमने गरीबों के लिए ये किया है, वो किया है। सरकारी कोश से गरीबों को सहारा देने के लिए कितने रुपए खर्चे किए हैं।

यह बात वर्ल्ड ह्यूमेन राइट ऑबजर्वर प्रीति धारा ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कही।

राजनैतिक दलों की रैलियों के लिए भी बहुत सारे गरीबों को ट्रक में भर-भर कर इकठ्ठे किया जाता है ताकि जन समुद्र इकठ्ठा किया जा सके। और तो और अगर गरीब अनुसूचित जाति या अल्प संख्यक हों तो गरीबी में चार चांद लग जायेगा। तो चलो ऊपर वाले से दुआ करें कि अगले जन्म मोहे गरीब के घर में जन्म दिलाए।

कुछ गरीबों के झुंड सरकारी जगह पर झोपड़ पट्टी बना लेते हैं और कुछ राजनेता वोट के लिए इनका खूब इस्तेमाल करते हैं। जब इनको जगह खाली करने को बोला जाता है तो कितने समाजसेवी संस्था और विपक्ष के कुछ नेता इनके लिए सरकारी आवास की मांग करते हैं। फिर सरकारी जगह खाली करने के बदले इनको पक्का मकान मिल जाता है। यही तो फंडा है दोस्तांे बनाते जाओ झोपड़ पट्टी और लेते जाओ पक्का मकान।

आजकल इतनी समाजसेवी संस्थायें खुल गई हैं कि उनकी गिनती करना मुश्किल है। सब को समाज के गरीब लोगों की मदद करनी है। कुछ तो गरीब को खाना, कपड़ा या कुछ समान दान करके उसमें अपनी उम्रभर की कमाई का साधन ढूंढते है। आज समाज में लाखो संस्थाएं गरीबों के लिए काम कर रही हैं। सो जब फायदा इतना ही है तो हम पीछे क्यों रहे। तो चलो दोस्तों गरीबों में अपना नाम लिखवाए…

 

 

ये लेखक के अपने विचार है, इससे महानाद का कोई लेना-देना नहीं है।

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