नई दिल्ली (महानाद) : देश की सर्वोच्च अदालत ने आज एक अहम फैसला सुनाते हुए आज मंगलवार को कहा कि हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म को मानने वाले के अलावा किसी और धर्म के व्यक्ति को अनुसूचित जाति (एससी) का दर्जा नहीं दिया जा सकता।
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा एवं जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले को उचित ठहराते हुए कहा कि एससी समुदाय से संबंध रखने वाला कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे धर्म में धर्मांतरण करते ही तुरंत अपना एससी का दर्जा खो देता है।
बता दें कि आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने 30 अप्रैल 2025 को एक फैसला सुनाया था कि एक बार जब कोई व्यक्ति ईसाई धर्म अपना लेता है और उसका पालन करता है तो उसे एससी समुदाय का सदस्य नहीं माना जा सकता। हाई कोर्ट ने कहा था जाति व्यवस्था ईसाई धर्म का हिस्सा नहीं है, इसलिए ऐसे व्यक्ति को एससी/एसटी एक्ट के प्रावधानों का लाभ नहीं मिल सकता।
हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि धर्मांतरण के साथ ही व्यक्ति का अनुसूचित जाति (एससी) का दर्जा तुरंत खत्म हो जाता है।
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