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Friday, July 10, 2026
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किशाऊ बांध परियोजना पर राज्यों में बनी सहमति, यमुना के पुनर्जीवन का रास्ता हुआ साफ

 

नई दिल्ली। यमुना नदी के पुनर्जीवन के लिए प्रस्तावित लंबे समय से लंबित किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना पर मंगलवार को महत्वपूर्ण सहमति बन गई। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में संबंधित राज्यों ने परियोजना के क्रियान्वयन के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने पर सहमति व्यक्त की।

बैठक में तय किया गया कि समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने के बाद किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को मंजूरी के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा। इस परियोजना में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान सहभागी राज्य हैं।

बैठक में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, केंद्रीय गृह सचिव, जल संसाधन सचिव, विद्युत मंत्रालय के सचिव, दोनों राज्यों के मुख्य सचिव तथा विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि परियोजना के जल घटक की लागत का 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार केंद्रीय सहायता के रूप में वहन करेगी, जबकि शेष 10 प्रतिशत खर्च छहों राज्यों द्वारा साझा किया जाएगा।

इसके अलावा हिमाचल प्रदेश के हिस्से के पानी को दिल्ली और राजस्थान को आवंटित करने पर भी सहमति बनी। बदले में दिल्ली और राजस्थान, परियोजना के विद्युत उत्पादन घटक में हिमाचल प्रदेश के हिस्से की लागत का वहन करेंगे।

केंद्र सरकार के अनुसार यह निर्णय यमुना नदी को स्वच्छ और अविरल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। परियोजना के पूर्ण होने पर यमुना में स्वच्छ जल का प्रवाह बढ़ेगा, जिससे नदी के संरक्षण और पुनर्जीवन के प्रयासों को नई मजबूती मिलेगी।

बैठक में कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार वर्षों से लंबित राष्ट्रीय और जनहित से जुड़े विषयों का समाधान संवाद से समाधान की भावना के साथ कर रही है। किशाऊ बांध परियोजना पर बनी यह सहमति इसी दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

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