शख्सियत : जिंदगी का सफर अंतरराष्ट्रीय जादूगरनी डॉ. पल्लवी की जुबानी

शख्सियत : जिंदगी का सफर अंतरराष्ट्रीय जादूगरनी डॉ. पल्लवी की जुबानी

👍तीन हजार से अधिक शो कर चुकी हैं पल्लवी
👍जादू के साथ साथ स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी सक्रिय
👍हजारो लोगो को दर्द से दिला चुकी हैं छुटकारा
👍इलाज के साथ सकारात्मक सोच भी करती हैं विकसित

महानाद संवाददाता प्रदीप फुटेला की डॉ0 पल्लवी की खास बातचीत
महानाद डेस्क : महाराष्ट्र में नासिक के पास ओझर नाम का छोटा सा गांव । वहाँ के मशहूर, मेहनती डॉक्टर साहब के दो बेटे और एक छोटी सी गुड़िया । डॉ. साहब का नाम गुलाबचंद कासलीवाल और माता जी का नाम क्षमा। अपने नाम के अनुसार डॉ. साहब ने अपने बच्चों को कली की तरह पाला और खिलते हुये गुलाब की तरह महकाया। माँ भी अपने नाम के अनुसार क्षमा की साक्षात् देवी ही है । माँ शुरू से धार्मिक परिवार जैन।

30 साल पहले की बात है जैन लोगों की समाज में धारणा थी, लडकियों ने खाना बनाना, घर को संभालना, बुजुर्गो की सेवा करना यही जरूरी बाते सीखनी चाहिये । माँ की भी दिनचर्या कुछ ऐसे ही थी । रोज मंदिर में जा कर के भगवान का अभिषेक करना, दर्शन करना, रसोई, बच्चों की देखभाल । ऐसे माहौल में आप पल रही थी । जब आप 8-9 साल की थी, गर्मी की छुट्टियां चल रही थी, आपके बडे भाई पराग ने जादु की कला सीखने के लिये घर से 22 किलोमीटर दूरी पर, 20 दिन के लिये एक कार्यशाला में प्रवेश लिया । छोटी सी गुडिया पल्लवी भी जिद करने लगी, पापा मुझे भी जादू सीखना है ।

पिताजी डॉक्टर होने के कारण उन्हें ज्यादा समय नहीं मिलता था । माँ गृहस्वामिनी । इतनी दूर लेके जाना, जिम्मेदारी से ले के आना इतना प्रबंध कैसे करेंगे ? उनके लिये समय निकालना मुश्कील था । पर इच्छा देखकर पिता जी ने रास्ता निकाल ही लिया । फिर उस कार्यशाला में आपको स्वर्णपदक मिला । यहाँ से आपके जिंदगी का सफर शुरू हुआ । फिर जयपूर में परंपरागत कार्यक्रम था, कुछ दो सौ से ज्यादा जादूगर पूरे देश से आये थे । वहाँ आपके जादू के प्रयोग की बहुत प्रशंसा हुई । खास करके राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जो खुद एक जादूगर है, उनके पिता जी भी जादूगर थे । उन्होंने कहा – आपकी बच्ची बहुत ही होनहार है, होशियार है आप उसे आगे बढ़ने के लिये सहयोग दीजिये, हमारी तरफ से भी पूरा सहयोग है, आशीर्वाद है ।

आपके नानांजी और नानीजी दोनो भी जैन संन्यासी है । भारत में जैन समाज के बहुत ही आदरणीय आचार्य । उन्होंने भी पिता से और माता जी से कहा – इस बच्ची को आगे बढ़ने के लिये पूरा पूरा सहयोग देना । गुरुजनों के आशीर्वाद से भाई पराग जादू के प्रयोग करने लगे । जादू के कार्यक्रम को बहुत सराहा गया । बच्चे, बूढ़े सबको आनंद आ रहा था । शाकाहार और अहिंसा के विषय पर आपके वक्‍तव्य को भी लोगो ने बहुत पसंद किया । सभी जादू के कार्यक्रम विकलांग, कैंसर पीडित बच्चे, मंदिर – निर्माण ऐसे अच्छे उद्देश के लिये किये । इसमें कितनी ही लोगों को दुवाऐ छिपी हुई थी । पढ़ाई और जादू के कार्यक्रम दोनों को ही कुशलता से संभाला । पूरे भारत देश में करीब तीन हजार कार्यक्रम किये । । तब दूरदर्शन, भोपाल दूरदर्शन, मॉरिशियस दूरदर्शन, पर आपको खूब प्रसिद्धि मिली । लिम्का बुक में आपका नाम दर्ज हुआ, तरुण जादूगरनी पुरस्कार, भारत की सबसे अच्छी जादूगरनी पुरस्कार, जैन राष्ट्र गौरव पुरस्कार, भविष्य की नारी पुरस्कार (वूमन ऑफ दी फ्यूचर अ‍ॅवार्ड), विवा भारतीय पुरस्कार, सुकन्या पुरस्कार, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन् पुरस्कार आदि कई सारे पुरस्कार से आपको सम्मानित किया गया ।

अखिल भारतीय नारी प्रगति मंच की आप सबसे छोटी और सक्रिय सदस्या बन गयी । फिजियोथेरेपी की डिग्री लेने के बाद मास्टर डिग्री ली । अपने पति डॉ. आलाप के साथ 2011 में ‘एमपावर’ नाम का फिजोथेरपी सेंटर नासिक में शुरू किया । डॉ. आलाप, और टीम ने करीब 30-35 हजार मरीज और उनके रिस्तेदारों का इलाज किया । करीब 3000 मरीज की कमर, गर्दन, घुटने की शल्य चिकित्सा (सर्जरी) आप की वजह से टल गयी । आपके इलाज का तरीका सबसे बेहतरीन और अलग ही है। लोगों के दर्द की जड़ को समझना और उसमें से उनको बाहर निकालके उनको जिंदगी जीने का आनंद देना, यही उद्देश आपने जिंदगी में रखा।

आप फिजीओथेरपी के साथ मरीज को सकारात्मक विचार रखने के लिए प्रेरित कर उनको शरीर स्वास्थ के लिये ध्यान (मेडीटेशन) सुनवाना, प्राणीक हिलींग देना (यह एक तरह की उर्जा है, जिसे मरीज को ठीक करने में मदद मिलती है ।)

आपने एक किताब भी लिखी है, जिसका नाम ‘द डोअर टू कॉन्फिडन्स ओपन्स हिअर’ । इस किताब में आपने बहुतसे इलाज के दरवाजे खोल दिये है । इस कोविड के कठीन समय में ‘यू ट्यूब’ द्वारा लोगों को, परिवार के सदस्य, रिश्तेदारों को सही सलामत बचाने हेतू आवश्यक बाते, आवश्यक स्वास्थ कसरते बतायी ।मरीज के दर्द की जड़ तक पहुँच के सच्चे दिल से इलाज करना, आपका शौक है ।

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