देश की डिफाल्टर कंपनी कर रही प्रतिमाह करोड़ों की वसूली

शिशिर भटनागर

मुरादाबाद (महानाद) : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार बनने के बाद से सबसे ज्यादा शिकंजा बैंक से कर्ज लेकर मौज करने वाले कारोबारियों पर कसा गया है। सरकार के दबाव के चलते ही कुछ बड़े कारोबारियों को देश छोड़कर भागने के लिए मजबूर होना पड़ा।

लेकिन, मौजूदा समय में देश की अर्थ व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा संकट आईएल एंड एफएस (इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस एंड लीजिंग सर्विस लिमिटेड) ने खड़ा कर दिया है। नब्बे हजार करोड़ रुपये का कर्ज लेकर यह कंपनी खुद को दीवालिया घोषित कर चुकी है। वहीं प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी इस मामले की जांच करते हुए मुंबई की विशेष कोर्ट में पहला आरोप पत्र दाखिल कर चुके हैं। ईडी अभी तक इस कंपनी की लगभग 570 करोड़ रुपये की संपत्ति को जब्त कर चुका है। वहीं देशभर में संचालित हो रही इस कंपनी की शाखाओं पर भी ईडी के अधिकारी नजर बनाए हुए हैं।

मुरादाबाद जनपद में भी आईएल एंड एफएस कंपनी का बड़ा कारोबार है। जिसमें 121 किलोमीटर लंबे बरेली-मुरादाबाद एक्सप्रेस-वे में दो टोल प्लाजा पर वसूली का काम इसी कंपनी के द्वारा किया जा रहा है। कंपनी डिफाल्टर घोषित होने के बाद भी प्रतिमाह एक्सप्रेस-वे से करोड़ों रुपये का टोल वसूल रही है। हालांकि टोल वसूली के बाद भी एक्सप्रेस-वे में मूलभूत सुविधाओं की कमी साफ तौर पर दिखाई देती है। हालांकि केंद्र सरकार ने इस कंपनी के बोर्ड को पहले ही भंग करके अपने नियंत्रण में ले लिया था, लेकिन इसके बाद भी कंपनी के कामकाज में कोई बहुत ज्यादा फर्क नही दिखाई दिया है।

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