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Saturday, April 4, 2026
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काशीपुर की उर्वशी बाली ने जीता राष्ट्रीय सौंदर्य प्रतियोगिता का खिताब

विकास अग्रवाल
काशीपुर (महानाद) : काशीपुर निवासी एवं भाजपा नेता दीपक बाली की धर्मपत्नी उर्वशी दत्त बाली ने राजस्थान के जयपुर में 19 दिसंबर 2024 को आयोजित सौंदर्य प्रतियोगिता में रैंप पर चलकर क्राउन जीत कर देवभूमि उत्तराखंड के साथ-साथ काशीपुर का नाम रोशन किया है।

आपको बता दें कि वर्ष 1994 में जब सुष्मिता सेन मिस यूनिवर्स बनी थी, तब उर्वशी दत्त बाली पढ़ाई कर रही थी। उनके पिता फौज में अधिकारी थे। सुष्मिता सेन को रैंप पर चलते देख उर्वशी दत्त बाली का बहुत मन था कि वह भी इस तरह की प्रतिस्पर्धा में भाग लें लेकिन पिता उन्हें एक बड़ा पुलिस अधिकारी बनाना चाहते थे। लिहाजा उन्होंने इधर-उधर सोचने की बजाय पढ़ाई करने पर जोर दिया और पिता की सख्ती के आगे एक बेटी का सपना धरा रह गया।

उर्वशी बाली

उर्वशी को बचपन से ही कपड़े डिजाइन करने का बहुत शौक था और कम जेब खर्च होते हुए भी वह जैसे-तैसे कर अपनी इच्छा पूरी कर लेती थीं। वह बताती हैं कि उनका जो सपना पिता के कारण अधूरा रह गया था वह पति के सहयोग से अब 30 साल बाद पूरा हुआ है। उनका मानना है कि जिस तरह हर कामयाब पुरुष के पीछे उसकी पत्नी का सहयोग होता है ठीक उसी तरह उनकी उन्नति में उनके पति दीपक बाली का बहुत बड़ा सहयोग है।

उर्वशी ने बताया कि हाल ही में 5 दिसंबर 2024 को उन्होंने Vouge Star का फॉर्म भर दिया और 15 दिन पहले मिसेज इंडिया Vouge स्टार इंडिया की तरफ से पता चला कि मिसेज इंडिया Contest हो रहा है। देश भर की करीब 2000 महिलाओं में से जो 120 महिलाएं इस सौंदर्य प्रतियोगिता के लिए चुनी गईं उसमें उनके नाम का भी चयन हो गया और उन्होंने रैंप पर चलकर Vouge Star का सौंदर्य क्राउन जीतने में सफलता हासिल की।

उर्वशी बाली ने महिलाओं को संदेश दिया कि महिलाओं को कभी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए और अपने आप को आगे बढ़ाने और अलग प्रदर्शित करने में पूरी मेहनत करनी चाहिए। ज्यादातर औरतें घर में सारा दिन बच्चों और पति के लिए काम करते-करते अपने आप को भूल जाती हैं जबकि एक औरत का काम ही साज सज्जा का है, इसलिए हर औरत को अपने लिए भी समय निकालना चाहिए।

उर्वशी ने कहा कि यदि आप प्रयासरत हैं तो देर सवेर सफलता जरूर मिलेगी। जैसा कि मेरे साथ हुआ। वह अभिभावकों से भी अनुरोध करती है कि वह अपने बच्चों की इच्छा को समझते हुए उनकी शिक्षा की व्यवस्था करें। यह नहीं कि बच्चा कुछ चाहता है और मां-बाप अपनी इच्छा से पढ़ाई दूसरी करा देते हैं, इससे प्रतिभा दब कर रह जाती है।

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