नई दिल्ली (महानाद) : विगत लगभग 12 वर्षों से देश की सत्ता से दूर कांग्रेस ने सत्ता के सुख को महसूस करने के लिए आज अपनी ही संसद बना ली और उस संसद में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश कर दिया।
जी हां, अब लगता है कांग्रेस को चुनी हुई सरकार और संसद भवन में बहस करना, कोई प्रस्ताव लाना, महाभियोग प्रस्ताव लाना रास नहीं आ रहा है। इसलिए उसने आज कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के निवास पर अपनी ही संसद सजा ली। अपनी लोकसभा अध्यक्ष (कांग्रेस की पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार) चुन ली है और उस संसद में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पास कर उन्हें हटाने और एसआईआर प्रक्रिया को रोकने का प्रस्ताव पास कर दिया।
लेकिन कांग्रेस शायद भूल गई कि ऐसे प्रस्ताव पास कर केवल उन्हें आत्मसंतुष्टि ही मिल सकती है। इसके परिणामस्वरूप उन्हें कुछ हासिल नहीं होगा।
बता दें कि जब-जब संसद सत्र की शुरुआत हुई तब-तब कांग्रेस सहित समूचे विपक्ष ने संसद को चलने नहीं दिया। वहां बहस न कर केवल हंगाम काट कर लोकसभा कार्यवाही को स्थगित करवाते रहे और आज एक मौक संसद का आयोजन कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाये हैं।
अपनी बनाई संसद में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि करीब सात महीने पहले विपक्ष के 193 सांसदों ने संसद के दोनों सदनों में मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव पेश किया था, लेकिन उनके नोटिस खारिज कर दिए गए और उन पर कोई विचार नहीं किया गया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम किसी व्यक्ति के खिलाफ निजी लड़ाई नहीं है, बल्कि एक संवैधानिक संस्था की गरिमा और विश्वसनीयता बनाए रखने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि विपक्ष चाहता है कि चुनाव आयोग संविधान की भावना के अनुरूप निष्पक्षता से काम करे, ताकि आम नागरिकों का उस पर भरोसा कायम रहे।
खड़गे ने चिंता जताते हुए कहा कि कंप्यूटर के माध्यम से कमजोर वर्गों, महिलाओं और युवाओं के नाम मतदाता सूची से चुपचाप हटाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक को उसके मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।



