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Monday, August 10, 2026
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तो क्या छठीं बार फिर से चीमा को ही मिलेगा काशीपुर विधानसभा का टिकट?

विकास अग्रवाल
महानाद डेस्क : काशीपुर विधानसभा से भाजपा का टिकट चाहने वाले नेताओं को लगता है इस बार भी मायूस होना पड़ेगा और चीमा एक बार फिर से टिकट पाने में कामयाब हो जायेंगे।

वैसे तो राजनीति में कुछ भी कहना या अनुमान लगाना मुश्किल होता है। और पार्टी के सर्वे, कार्यकर्ताओं की इच्छा और चुनाव प्रभारियों की रिपोर्ट के बावजूद आलाकमान जिसे चाहता है, उसे पार्टी का टिकट मिलता है। लेकिन हर बार की तरह उत्तराखंड विधानसभा चुनावों में काशीपुर से टिकट की आस लगाये भाजपा के दिग्गजों को ‘अकाली दल’ के चीमा के आगे हार माननी पड़ सकती है और पार्टी 5 बार (4 बार के हरभजन सिंह चीमा तथा एक बार के त्रिलोक सिंह चीमा) के विजेता ‘चीमा’ को फिर से काशीपुर विधानसभा से अपना उम्मीदवार बना सकती है।

आपको बता दें कि पंजाब में भाजपा अकाली दल से गठबंधन होने के कारण उत्तराखंड की एक सीट अकाली दल के प्रदेश अध्यक्ष हरभजन सिंह चीमा को दी गई, हांलाकि वे हर बार भाजपा के चुनाव चिन्ह से चुनाव लड़े और लगातार 4 बार जीत हासिल की। पिछली बार भाजपा का अकाली दल से गठबंधन टूट चुका था लेकिन हरभजन सिंह चीमा अपने ट्रेक रिकार्ड के कारण अपने सुपुत्र त्रिलोक सिंह चीमा को भाजपा का टिकट दिलाने में कामयाब रहे और उनके सुपुत्र भी भारी मतों से चुनाव जीतकर विधायक बने।

अब एक बार फिर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अकाली दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखवीर सिंह बादल से मुलाकात के बाद सुगबुगाहट होने लगी है कि पंजाब चुनाव को देखते हुए भाजपा का अकाली दल से फिर से गठबंधन हो जायेगा। यदि भाजपा का अकाली दल से गठबंधन हो जाता है तो एक बार फिर से प्रबल संभावना बन जायेगी कि काशीपुर का टिकट फिर से त्रिलोक सिंह चीमा को ही मिलेगा।

वहीं, आपको बता दें कि कार्यकर्ताओं का मानना है कि चीमा को हर बार जो जीत मिली है वह ‘कमल के फूल’ के कारण मिली है। क्योंकि उनके द्वारा कराये गये विकास कार्यों की लिस्ट नगण्य है। शहर में विधायक की उपस्थिति बहुत कम दिखाई देती है। उनके द्वारा कराये गये कामों के पत्थर भी कम ही देखने को मिलते हैं।

उधर, जब से पुष्कर सिंह धामी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने हैं और दीपक बाली काशीपुर के मेयर बने हैं तब से काशीपुर के विकास व सौंदर्यीकरण के लिए सरकार से बहुत धनराशि मिल रही है और शहर में काम भी होते दिख रहे हैं। मेयर दीपक बाली के यहां उमड़ती फरियादियों की भीड़ यह बताती है कि काशीपुर को अब जाके कोई जनता की फरियाद सुनने वाला नेता मिला है।

लोगों में अटकलें हैं कि दीपक बाली के मेयर बनने के बाद से काशीपुर के विकास के लिए जितना पैसा मिल रहा है उसे देखकर लगता है कि खुद मुख्यमंत्री पुष्कर धामी काशीपुर से चुनाव लड़ सकते हैं या उनके कंधे से कंधा मिलकार काशीपुर का विकास करने में जुटे मेयर दीपक बाली को भी पार्टी का टिकट मिल सकता है। बाकी राजनीति अनिश्चतताओं का खेल तो है ही…

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