विकास अग्रवाल
महानाद डेस्क : लगभग 37 दिनों तक जंतर-मंतर पर चले कॉकरोच जनता पार्टी का धरना-प्रदर्शन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के बाद खत्म हो गया। लेकिन एक यक्ष प्रश्न वहीं खड़ा है कि क्या धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब कभी कोई पेपर लीक नहीं होगा?
जी हां, क्या किसी मंत्री का इस्तीफा, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, भारी भरकम जुर्माने का डर किसी पेपर को लीक होने से रोक सकता है? सीजेआइ के कॉकरोच कहने से सोशल मीडिया पर एक कॉकरोच जनता पार्टी का जन्म हो गया और पार्टी का फाउंडर अमेरिका में रहने वाला अभिजीत दिपके नीट पेपर लीक के विरोध में जंतर मंतर आकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर धरना देने लगा। उसके समर्थन में सोनम वांगचुक उतर आये और वे भी इस्तीफे की मांग को लेकर भूख हड़ताल करने लगे।
वहीं, विपक्षी पाटिर्यों को मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने का मौका मिल गया और सारे विपक्षी नेता जंतर-मंतर पर पहुंचकर कॉकरोच जनता पार्टी और उनकी मांगों के समर्थन में खड़े हो गये। विपक्षी पार्टी का समर्थन लेने वाली कॉकरोच जनता पार्टी न तो कांग्रेस से यह पूछ पाई की वह कर्नाटक में हुए पेपर लीक मामले में वहां के शिक्षा मंत्री का इस्तीफा कब लेगी, वहीं न वह आप के नेताओं से यह पूछ पाई कि पंजाब में हुए पेपर लीक मामले में वह पंजाब के शिक्षा मंत्री का इस्तीफा कब लेगी।
छात्रों की समस्या किसी मंत्री के इस्तीफे से हल नहीं होने वाली। जरूरत थी इस समस्या के हल के लिए किसी फुल प्रूफ प्लान को पेश करने की, जिसमें कॉकरोच जनता पार्टी असफल रही। जब कॉकरोच जनता पार्टी जंतर मंतर पर धरने पर बैठी तो उसके पास पहले से पेपर लीक को रोकने के लिए एक बेहतर फुलप्रूफ प्लान होना चाहिए था और उसे यह प्लान सरकार के सामने रखना चाहिए था। लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी के पास ऐसा कोई प्लान था ही नहीं, इसलिए उसने अपना सारा ध्यान शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा मांगने पर लगाया और जैसे ही धर्मेन्द्र प्रधान ने इस्तीफा दिया वैसे ही कॉकरोच जनता पार्टी जंतर मंतर से अपना बोरिया बिस्तर समेट कर चली गई और यह यक्ष प्रश्न वहीं खड़ा हो गया कि क्या धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब इस देश में कहीं, कोई पेपर लीक नहीं होगा?
उधर, इस धरना-प्रदर्शन के दौरान एक प्रश्न और खड़ा हुआ है कि क्या भारत की युवा पीढ़ी खासकर युवतियां अपने संस्कारों को भूल गई हैं। इस प्रदर्शन के दौरान काफी सारी युवतियों के पोस्टर, बैनर व अभद्र भाषा सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। युवतियों द्वारा उन बातों को पोस्टरों पर लिखकर गर्व से प्रसारित किया गया जिन बातों को कोई महिला तो क्या पुरुष भी कहने में शरमा जाता है। युवतियों द्वारा प्रधानमंत्री के लिए इतनी गंदी गालियां दी गईं जिन गालियों को पुरुष भी देने में हिचकिचाता है।
इस सब से कहीं न कहीं यह साबित होता है कि हमारी पीढ़ी (जेन एक्स) इस जेन जेड को अपने संस्कार ट्रांसफर करने में असफल साबित हो गई। हम अपने बच्चों को संस्कारों की शिक्षा देने में नाकाम हो गये। जिस कारण उनकी इतनी हिम्मत हो गई कि वे खुलेआम अभद्र भाषा, गालियां देने में लगे रहे। उन्हें अपने इस कृत्य पर इसलिए भी शर्म नहीं आई कि जब हमारे अभिभावक इस वीडियो/तस्वीर को देखेंगे तो वे उनके बारे में क्या सोचेंगे।
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